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सोमवार, 17 सितंबर 2012

"बे-नूर हो गये हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

आज एक पुराना गीत
रहते थे पास में जो, वो दूर हो गये हैं।
मगरूर थे कभी जो, मजबूर हो गये हैं।।

श्रृंगार-ठाठ सारे, करने लगे किनारे,
महलों में रहने वाले, मजदूर हो गये हैं।
मगरूर थे कभी जो, मजबूर हो गये हैं।।

थे जो कभी सरल से, अब बन गये गरल से,
जो थे कभी सलोने, बे-नूर हो गये हैं।
मगरूर थे कभी जो, मजबूर हो गये हैं।।

रहते गुमान में थे. बैठे जो शान से थे,
पर्वत से टूटकर कर वो,सब चूर हो गये हैं।
मगरूर थे कभी जो, मजबूर हो गये हैं।।

सपने हुए सयाने, सच को लगे चिढ़ाने,
अब देखकर हकीकत, काफूर हो गये हैं।
मगरूर थे कभी जो, मजबूर हो गये हैं।।

17 टिप्‍पणियां:

  1. थे जो कभी सरल से, अब बन गये गरल से,
    जो थे कभी सलोने, बे-नूर हो गये हैं।
    मगरूर थे कभी जो, मजबूर हो गये हैं।।

    यही है ज़िन्दगी का सच ।

    उत्तर देंहटाएं
  2. रहते गुमान में थे. बैठे जो शान से थे,
    पर्वत से टूटकर कर वो,सब चूर हो गये हैं।
    मगरूर थे कभी जो, मजबूर हो गये हैं।।

    एक कटु सत्य जीवन का , जिससे इनकार नहीं किया जा सकता है. जीवन के सत्य को समझ कर जिया जाय तो बहुत सुखद है नहीं तो --
    कर्म प्रधान विश्व रचि रखा, जो जस करई सो जस फल चखा .

    उत्तर देंहटाएं
  3. वाह...
    रहते गुमान में थे. बैठे जो शान से थे,
    पर्वत से टूटकर कर वो,सब चूर हो गये हैं।
    मगरूर थे कभी जो, मजबूर हो गये हैं।।

    अच्छा हुआ...होना ही था......
    बढ़िया रचना सर.
    सादर
    अनु

    उत्तर देंहटाएं
  4. मगरूर को मजबूर होना ही पड़ता है एक दिन...
    बहुत बड़ी सच्चाई शास्त्री सर !
    ~सादर !

    उत्तर देंहटाएं
  5. सपने हुए सयाने, सच को लगे चिढ़ाने,
    अब देखकर हकीकत, काफूर हो गये हैं।
    मगरूर थे कभी जो, मजबूर हो गये हैं।।
    बहुत ही सुंदर रचना |
    मेरी नई पोस्ट में आपका स्वागत है |
    बुलाया करो

    उत्तर देंहटाएं
  6. सबको एक दिन ढह जाना है,
    लहर समय की, बह जाना है।

    उत्तर देंहटाएं
  7. काश लोग समझ पाते हकीकत को ..
    खासतौर पर हमारे तहजीब के शहर वाले

    बहुत सुंदर

    उत्तर देंहटाएं
  8. मगरूर थे कभी जो, मजबूर हो गये हैं।।
    वाह !
    पर समय के साथ यही होता है
    उस समय फिर आदमी रोता है !

    उत्तर देंहटाएं
  9. थे जो कभी सरल से, अब बन गये गरल से,
    जो थे कभी सलोने, बे-नूर हो गये हैं।

    बहुत सटीक

    उत्तर देंहटाएं

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