"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

रविवार, 23 सितंबर 2012

"माली अब गद्दार हो गये" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


रिश्ते-नाते, आपसदारी, कलयुग में व्यापार हो गये।
पगड़ी पर जो दाग लगाते, बे-गैरत सरदार हो गये।।

असरदार हो गये किनारे, फिरते दर-दर, मारे-मारे,
खुद्दारी की माला जपते, माली अब गद्दार हो गये।।

मन्त्री-सन्त्री और विधायक, खुलेआम कानून तोड़ते,
दूध-दही की रखवाली में, बिल्ले पहरेदार हो गये।

नैतिक और अनैतिकता से, आय-आय कैसे भी आये,
घोटालों में लिप्त धुरन्धर, सत्ता के हकदार हो गये।

अपने होठों को सी लेना, जनता की ये लाचारी है,
रोटी-रोजी के बदले में, भाषण लच्छेदार हो गये।

कहीं कीच में कमल खिला है, कहीं हाथ को राज मिला है,
मौन हो गये कर्म यहाँ पर, मुखरित अब अधिकार हो गये।

20 टिप्‍पणियां:

  1. सही ब्‍यान कि‍ए हैं हालात आज के

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाह शास्त्री जी वाह ! दिल को असीम संतुष्ठी मिली, आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  3. आज के हालात की बहुत सटीक अभिव्यक्ति...

    उत्तर देंहटाएं
  4. आज जिस हालात से आम लोग गुजर रहे है उसका पुर जोर विरोध अब होना चाहिए | समय पर तीखा प्रहार करती पोस्ट |

    उत्तर देंहटाएं
  5. आपकी कलम को नमन करने का मन कर रहा है. जिस तरह से अपने सत्ता के काबिज और देश के हालात को बयान कर दिया है और वह भी इतनी सुंदर पद्य रूप में , सब के वश की बात नहीं है.
    बहुत सुंदर बात कही है.

    उत्तर देंहटाएं
  6. आज के हालात के बारे में सटीक वर्णन किया है आपने !!

    उत्तर देंहटाएं
  7. शास्त्री जी .मुबारक कबूले अपनी इस रचना पर !!!!!

    उत्तर देंहटाएं
  8. आपकी इसी शैली का मैं कायल हूं। आज की विषम परिस्थिति पर कटाक्ष करती यह रचना मन के बहुत गहरे पैठ गई और अनायास इसे गाने लगा।

    उत्तर देंहटाएं
  9. आज के हालात पर सही विवरण...बढ़िया

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत ख़ूब!
    आपकी यह सुन्दर प्रविष्टि कल दिनांक 24-09-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-1012 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं

  11. "माली अब गद्दार हो गये" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

    रिश्ते-नाते, आपसदारी, कलयुग में व्यापार हो गये।
    पगड़ी पर जो दाग लगाते, बे-गैरत सरदार हो गये।।

    बहुत युगीन व्यंग्य केंद्र के काम काज पे .जीते रहो शास्त्री जी .आबाद रहो .असरदार(अ -सरदार ) रहो .

    उत्तर देंहटाएं
  12. वाह ! बहुत सुंदर !

    माली अब गद्दार हो गये
    माली नहीं रोपते अब पौंधे
    काट पीट पर लगे हुऎ हैं
    माली अब तलवार हो गये !

    उत्तर देंहटाएं
  13. शास्त्रीजी,
    "बिल्ले पहरेदार हो गए"--इस जुमले पर झूम रहा हूँ ! तीक्ष्ण कटाक्ष पर साधुवाद !
    सादर--आ.

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails