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मंगलवार, 25 सितंबर 2012

"नेता सचमुच महान हैं" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक)


रोटी है,
बेटी है,
बँगला है,
खेती है,

सभी जगह
घोटाले हैं,
कपड़े उजले हैं,
दिल काले हैं,

उनके भइया हैं,
इनके साले हैं,
जाल में फँस रहे,
कबूतर भोले-भाले हैं,

गुण से विहीन हैं
अवगुण की खान हैं
जेबों में रहते,
इनके भगवान हैं

इनकी दुनिया का
नया विज्ञान है
दिन में इन्सान हैं
रात को शैतान हैं

न कोई धर्म है
न ही ईमान है
मुफ्त में करते
नही अहसान हैं

हर रात को बदलते
नये मेहमान है
मेरे देश के नेता
सचमुच महान हैं!

16 टिप्‍पणियां:

  1. बिलकुल बात सटीक है, बड़े महीन महान |
    नियत हमेशा लगी है, क्या क्या कैसे तान ?
    क्या क्या कैसे तान, बात कर नव वितान की |
    अपना हिन्दुस्तान, जाति यह गिरगिटान की |
    भाय भतीजावाद, नया धंधा इक पाला |
    देती दुनिया दाद, करे अपना मुंह काला ||

    उत्तर देंहटाएं
  2. न कोई धर्म है
    न ही ईमान है
    मुफ्त में करते
    नही अहसान हैं

    हर रात को बदलते
    नये मेहमान है
    मेरे देश के नेता
    सचमुच महान हैं!
    :)

    उत्तर देंहटाएं
  3. उनकी महानता की गाथा की
    सुन्दर प्रस्तुति!

    उत्तर देंहटाएं
  4. उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवार के चर्चा मंच पर ।।

    उत्तर देंहटाएं
  5. देश के वर्तमान राजनैतिक परिदृश्य का बहुत बढ़िया शब्द-चित्र प्रस्तुत किया आपने

    उत्तर देंहटाएं
  6. टोपी में ये पाल रहे हैं, काले धन के तोते,
    बापू अगर आज तुम होते..

    उत्तर देंहटाएं
  7. इसी लिए तो इन्होने स्लोगन दे दिया...मेरा भारत महान...इस तरह ये खुद महान बन बैठे...खूबसूरत व्यंग...

    उत्तर देंहटाएं
  8. गुण से विहीन हैं
    अवगुण की खान हैं..............अवगुण का पर्याय वाची अब कोयला हो गया
    जेबों में रहते,
    इनके भगवान हैं/इनकी दुनिया का
    नया विज्ञान है
    दिन में इन्सान हैं

    रात को शैतान हैं.......दिन में माला जपत हैं ,रात हनत हैं गाय .... /न कोई धर्म है
    न ही ईमान है
    मुफ्त में करते
    नही अहसान(एहसान ) हैं/....................इनके स्साले बहनोई और फूफा सब शैतान हैं .../देश का गिरवीं रखते ईमान है ...मेरे देश के नेता बड़े महान हैं .........नेता माने प्रेत ....कविता में मात्रा की छूट है भाई हो गया "प्रेता "...आजकल बहुत प्रखर(बहुत तेज़ ) आंच लिए आ रही है आपकी हर रचना .बधाई .

    ram ram bhai

    मुखपृष्ठ

    मंगलवार, 25 सितम्बर 2012
    आधे सच का आधा झूठ

    उत्तर देंहटाएं
  9. टोपी में ये पाल रहे हैं, काले धन के तोते,

    खाते दूध मलाई हैं महंगाई को रोते ..बाकी काम रविकर जी का शास्त्री जी का .....

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत सुंदर !

    कुछ भक्त चमचों के ये
    खुद होते ये भगवान हैं
    भक्त इनके और
    ये भक्तों के करते
    रहते गुणगान हैं !

    उत्तर देंहटाएं
  11. आजकल आपकी रचनाएँ नेताओं के प्रति बहुत प्रखर लग रही हैं :)

    उत्तर देंहटाएं
  12. समसामयिक स्थितियों पर व्यंग करती शानदार रचना |
    मेरी नई पोस्ट:-
    ♥♥*चाहो मुझे इतना*♥♥

    उत्तर देंहटाएं

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