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शनिवार, 29 सितंबर 2012

"पुकारती है भारती" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


हैं पूजनीय कोटि पद, धरा उन्हें निहारती।
सराहनीय शूद्र हैं, पुकारती है भारती।।

चरण-कमल वो धन्य हैं,
समाज को जो दें दिशा,
वे चाँद-तारे धन्य हैं,
हरें जो कालिमा निशा,
प्रसून ये महान हैं, प्रकृति है सँवारती।
सराहनीय शूद्र हैं, पुकारती है भारती।।

जो चल रहें हैं, रात-दिन,
वो चेतना के दूत है,
समाज जिनसे है टिका,
वे राष्ट्र के सपूत है,
विकास के ये दीप हैं, मही इन्हें दुलारती।
सराहनीय शूद्र हैं, पुकारती है भारती।।
जो राम का चरित लिखें,
वो राम के अनन्य हैं,
जो जानकी को शरण दें,
वो वाल्मीकि धन्य हैं,
ये वन्दनीय हैं सदा, उतारो इनकी आरती।
सराहनीय शूद्र हैं, पुकारती है भारती।।

13 टिप्‍पणियां:

  1. विद्या और ज्ञान...पर सबका हक है...भारत में ये सन्देश सदियों से मान्य है...आपने भी सुन्दर ढंग से अपनी बात रक्खी है...

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर पोस्ट शास्त्री जी...
    आभार आपका.
    सादर
    अनु

    उत्तर देंहटाएं
  3. जो चल रहें हैं, रात-दिन,
    वो चेतना के दूत है,
    समाज जिनसे है टिका,
    वे राष्ट्र के सपूत है,

    बेहतरीन रचना

    उत्तर देंहटाएं
  4. जो चल रहें हैं, रात-दिन,
    वो चेतना के दूत है,(हैं ).......हैं
    समाज जिनसे है टिका,
    वे राष्ट्र के सपूत है,(हैं ).......हैं ...
    विकास के ये दीप हैं, मही इन्हें दुलारती।
    सराहनीय शूद्र हैं, पुकारती है भारती।।

    उत्तर देंहटाएं
  5. जो चल रहें हैं, रात-दिन,
    वो चेतना के दूत है,(हैं ).......हैं
    समाज जिनसे है टिका,
    वे राष्ट्र के सपूत है,(हैं ).......हैं ...
    विकास के ये दीप हैं, मही इन्हें दुलारती।
    सराहनीय शूद्र हैं, पुकारती है भारती।।

    भाई साहब बहुत सार्थक रचना है सांगीतिक ,भावात्मक .चर्चा मंच का स्पैम बोक्स डायनासौर बना टिपण्णी निगल रहा है .२९ सितम्बर का चर्चा मंच मेरी दर्जन से ज्यादा टिपण्णी चबा चुका है हम भी कम ढीठ नहीं हैं और लिख देतें हैं -तू डाल डाल मैं पांत पांत ...हमारी सेहत की रिपोर्टों को स्पेस देने के लिए आपका यहाँ भी शुक्रिया ,वहां भी .

    उत्तर देंहटाएं
  6. वाल्मीकि जी को सादर नमन ||

    उत्तर देंहटाएं
  7. भारती सबको पुकारती है, सबकी आवश्यकता है उसे..

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत बढ़िया सन्देश परक रचना हेतु बधाई

    उत्तर देंहटाएं

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