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सोमवार, 11 फ़रवरी 2013

"प्रतिज्ञादिवस-समझ न लेना खेल" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

प्रतिज्ञा के दिवस पर, मत देना सन्ताप।
चमक-दमक की भीड़ में, बिछड़ न जाना आप।१।

जीवन के संग्राम को, समझ न लेना खेल।
जीवनसाथी से सदा, रखना हरदम मेल।२।

ताल-मेल के साथ में, पथ बनता आसान।
तन की सभी थकान को, हर लेती मुस्कान।३।

बेमन से देना नहीं, वचन किसी को मित्र।
जिसमें तुम रँग भर सको, वही बनाना चित्र।४।

सोच-समझकर थामना, अनजाने का हाथ।
जीवनसाथी से बँधा, जीवनभर का साथ।५।

17 टिप्‍पणियां:

  1. बेमन से देना नहीं, वचन किसी को मित्र।
    जिसमें तुम रँग भर सको, वही बनाना चित्र

    सुंदर भाव..

    उत्तर देंहटाएं
  2. ्वाह बहुत खूबसूरत चित्रण किया है।

    उत्तर देंहटाएं
  3. चुप रहने का शपथ ले, करूं खत्म सन्ताप |
    पत्नी जितना भी बके, रहूँ पड़ा चुपचाप |
    रहूँ पड़ा चुपचाप, मानता रविकर आज्ञा |
    करूँ ना कोई पाप, तोड़ कर बड़ी प्रतिज्ञा |
    रही ख़ुशी से बिता, पार्टी शॉपिंग गहने |
    लेती पूरा बोल, हमें कहती चुप रहने ||

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत भावपूर्ण उद्बोधन है शास्त्री जी |
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत ही भावपूर्ण सन्देश,आभार आपका।

    उत्तर देंहटाएं
  6. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि कि चर्चा कल मंगलवार 12/213 को चर्चा मंच पर राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आपका वहां स्वागत है

    उत्तर देंहटाएं
  7. वाह वाह क्या बात है गुरु जी,कितना खूबसूरत प्रॉमिस डे मनाया
    गौर कीजिएगा....
    गुज़ारिश : ''........तुम बदल गये हो..........''

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत अच्‍छी सलाह इस प्रति‍ज्ञा दि‍वस पर

    उत्तर देंहटाएं

  9. सोच-समझकर थामना, अनजाने का हाथ।
    जीवनसाथी से बँधा, जीवनभर का साथ।५।

    प्रेम दिवस पखवाड़े पे एक से बढ़के एक रचना ला रहें हैं आप .बधाई .

    उत्तर देंहटाएं
  10. ताल-मेल के साथ में, पथ बनता आसान।
    तन की सभी थकान को, हर लेती मुस्कान।३।

    बेमन से देना नहीं, वचन किसी को मित्र।
    जिसमें तुम रँग भर सको, वही बनाना चित्र।४।

    बेहद सार्थक ... एवं सशक्‍त पंक्तियां
    आभार आपका इस उत्‍कृष्‍ट पोस्‍ट के लिये

    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत सुंदर भावों से रची हुई रचना ! हर किसी को सोच-समझकर ही कोई वादा करना चाहिए....
    ~सादर!!!

    उत्तर देंहटाएं

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