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शनिवार, 23 फ़रवरी 2013

"कैसी है ये आवाजाही" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


जम जाता है लहू जहाँ पर,
पहरा देते वहाँ सिपाही।
मातृभूमि के लिए शहादत,
देते हैं जाँबाज सिपाही।।

कैसे सुधरे दशा देश की,
शासन की चलती मनचाही।
सुरसा सी बढ़ती महँगाई,
मचा रही है यहाँ तबाही।

जिनको राज-पाठ सौंपा था,
करते वो हर जगह उगाही।
इसीलिए तो घूस माँगती,
अफसरशाही-नौकरशाही।

देशभक्त की किस्मत फूटी,
गद्दारों को बालूशाही।
लोकतन्त्र के रखवालों को,
रोज चाहिए, सुरा-सुराही।

दोराहे पर जीवन भटका,
कैसी है ये आवाजाही।
उम्र ढल गई चलते-चलते,
लक्ष्य नहीं पाता है राही।

20 टिप्‍पणियां:

  1. आज की सच्चाई को बयां करती सार्थक रचना
    http://kaynatanusha.blogspot.in/

    उत्तर देंहटाएं
  2. ये हमारा दुर्भाग्य है शास्त्री जी , शहीदों की शहादत तो बेकार चली गयी देश फिर से चल पड़ा है हमें गुलाम बनाने के रस्ते पर. अपने ही घर में हम ठगे जा रहे हैं और अपने ही लोगों की देश के नाम पर बलि भी दे रहे हैं . जो राज्य कर रहे हैं वे सुरक्षित हैं सिर्फ और सातों सुख भोग रहे है .

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत बढ़िया है गुरुदेव -
    आभार-

    बालू शाही है अगर, तो निकलेगा तेल |
    आम रेत में क्या धरा, चढ़ टिब्बे पर खेल |
    चढ़ टिब्बे पर खेल, खिलाती नौकर-शाही |
    मँहगाई की आँच, बड़ी ही दारुण दाही |
    लूट रहे हैं धन धान्य, होय हर जगह उगाही |
    आम चाटते नमक, ख़ास की बालूशाही ||

    उत्तर देंहटाएं
  4. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (24-02-2013) के चर्चा मंच-1165 पर भी होगी. सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  5. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत ही सुन्दर रचना है दिल को छू गयीǃ आभार.....

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत उम्दा पंक्तियाँ ..... वहा बहुत खूब
    सच बयाँ करती आपकी रचना बस सही हाल बयाँ किया है आपने देश का
    मेरी नई रचना
    खुशबू
    प्रेमविरह

    उत्तर देंहटाएं
  8. वाह | बहुत ही भावपूर्ण वर्तमान परिस्थियों को दर्शित करती आपकी यह रचना महोदय | शुभकामनाएं आपको |

    उत्तर देंहटाएं
  9. आज की स्थिति को दर्शा रही है आपकी यह कविता.

    उत्तर देंहटाएं
  10. उम्र ढल गई चलते-चलते,
    लक्ष्य नहीं पाता है राही।
    बढ़िया चित्रण कुराज का .शासकी य अव्यवस्था का .

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत ही वास्तविक चित्रण , सुन्दर काव्य गठन, बहुत अच्छा लगा.
    सादर
    नीरज'नीर'
    www.kavineeraj.blogspot.com
    मेरी नई कविता "बम की जात" पढकर आशीर्वाद दें.

    उत्तर देंहटाएं
  12. सुन्दर एवं सटीक ..... वर्तमान को दर्शाती रचना ..
    बधाई ..

    उत्तर देंहटाएं

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