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सोमवार, 18 फ़रवरी 2013

"पत्थरों को तोड़ना" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

अब पढ़ाई और लिखाई छोड़ ना।
सीख ले अब पत्थरों को तोड़ना।।

काम मिलता ही नहीं है, शिक्षितों के वास्ते,
गुज़र करने के लिए, अवरुद्ध हैं सब रास्ते,
इस लिए मेहनत से नाता जोड़ ना।
सीख ले अब पत्थरों को तोड़ना।।

समय कटता है हमारा पत्थरों के साथ में,
वार करने को जिगर पर हथौड़ा है हाथ में.
देखकर नाज़ुक कलाई मोड़ ना।
सीख ले अब पत्थरों को तोड़ना।।

कोई रिक्शा खींचता है, कोई बोझा ढो रहा,
कोई पढ़-लिखकर यहाँ पर भाग्य को है रो रहा,
आ हमारे साथ श्रम को ओढ़ ना।
सीख ले अब पत्थरों को तोड़ना।।

20 टिप्‍पणियां:

  1. वहा क्या बात है बहुत ही अच्छी रचना
    बी एड। बैंक म ए नम्बर आयेगा नहीं
    फिर तुम पेट भर के खायेगा नहीं इस लिए
    खेतो मैं हल चलाना तू ना छोड़ना
    सीख ले अब पत्थरों को तोड़ना।।

    मेरी नई रचना
    फरियाद
    एक स्वतंत्र स्त्री बनने मैं इतनी देर क्यूँ
    दिनेश पारीक

    उत्तर देंहटाएं
  2. कितने ही भावों को सम्मिलित कर लिया आपने शास्त्री सर! बहुत सुंदर रचना !
    ~सादर!!!

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत ही सुन्दर भावों को समेटे हुए बेहतरीन प्रस्तुति.

    उत्तर देंहटाएं
  4. काम मिलता ही नहीं है, शिक्षितों के वास्ते,
    गुज़र करने के लिए, अवरुद्ध हैं सब रास्ते,
    इस लिए मेहनत से नाता जोड़ ना।
    सीख ले अब पत्थरों को तोड़ना।।

    आज की तो यही कडवी सच्चाई है।

    उत्तर देंहटाएं
  5. पत्थरो को तोड़ना -
    सटीक अभिव्यक्ति ||
    आभार आदरणीय ||

    उत्तर देंहटाएं
  6. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. आ हमारे साथ श्रम को ओढ़ ना।
      सीख ले अब पत्थरों को तोड़ना।।

      बहुत उम्दा सटीक प्रस्तुति,,,

      हटाएं
  7. सार्थक और सटीक कविता शास्त्री जी.........
    साभार ...!

    उत्तर देंहटाएं
  8. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि कि चर्चा कल मंगल वार 19/2/13 को राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच पर की जायेगी आपका हार्दिक स्वागत है

    उत्तर देंहटाएं
  9. आरछन नही माँगना ..... पत्थरों को तोड़ना।।.


    recent post
    फागुन .

    उत्तर देंहटाएं
  10. शिक्षित हो कर श्रम नहीं करना चाहते ..... भले ही बाबू के पद पर ही काम मिले .... श्रम करने को प्रेरित करती सुंदर रचना ।

    उत्तर देंहटाएं
  11. गहन और उत्तम अभिव्यक्ति ...!!

    उत्तर देंहटाएं
  12. राह में पत्थर पड़े हों, तो सजाऊँ राह कैसे..

    उत्तर देंहटाएं

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