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बुधवार, 13 फ़रवरी 2013

"आया है ऋतुराज" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

प्रेम-प्रीत के रंग ले, आया है ऋतुराज।
मना रहा है प्रणय दिन, होकर मस्त समाज।१।

चोंच कपोत लड़ा रहे, करते दिल की बात।
यापन करते रहेंगे, जन्म-ज़िन्दगी साथ।२।

शाखाओं पर आ गये, नवपल्लव परिधान।
मौसम है मधुमास का, पंछी गाते गान।३।

फूलों-कलियों पर चढ़ा, अब उपवन में रंग।
वासन्ती परिधान के, बड़े निराले ढंग।४।

सेमल पर छाये सुमन, वन में खिला पलाश।
सूरज देता ऊर्जा, निर्मल है आकाश।५।

18 टिप्‍पणियां:

  1. ऋतुराज वसंत की मन भावन वर्णनसुन्दर प्रस्तुति
    Latest post हे माँ वीणा वादिनी शारदे !

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत प्यारी...मनभावन प्रस्तुति.....
    सादर
    अनु

    उत्तर देंहटाएं
  3. मधुमास का सुन्दर वर्णन, बहुत प्यारी प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  4. मधुमास का बहुत ही सुन्दर चित्रण,मधुमास में तो सभी झुम उठते हैं,सादर आभार आपका।

    उत्तर देंहटाएं
  5. उत्कृष्ट प्रस्तुति-
    आभार आदरणीय | |

    उत्तर देंहटाएं
  6. मनभावन !
    बसंत पंचमी के दिन हमेशा... बचपन में वो पीले कपड़े पहनना बहुत याद है... और वो बेर का प्रसाद भी .. :))
    ~सादर!!!

    उत्तर देंहटाएं
  7. फूलों-कलियों पर चढ़ा, अब उपवन में रंग।
    वासन्ती परिधान के, बड़े निराले ढंग !!

    सुन्दर सुन्दर बसंत.....!

    उत्तर देंहटाएं
  8. तरु-पल्लव में झूमता
    आया-आया बसंत ...
    बहुत सुंदर रचना
    साभार





    उत्तर देंहटाएं
  9. वसंत ऋतु का बड़ा मनमोहक शब्द चित्र खींचा है आपने रचना में ! बहुत अनुपम अभिव्यक्ति ! बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं स्वीकार करें !

    उत्तर देंहटाएं
  10. बसन्‍त पंचमी की शुभकामनाएं।

    उत्तर देंहटाएं

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