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रविवार, 24 फ़रवरी 2013

"छन्द क्या होता है?" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

स्वाभाविक सा प्रश्न है छन्द क्या होता है?
     जो काव्य के प्रभाव को लययुक्त, संगीतात्मक, सुव्यवस्थित और नियोजित करता है। उसको छन्द कहा जाता है। छन्दबद्ध होकर भाव प्रभावशाली, हृदयग्राही और स्थायी हो जाता है। इसलिए कहा जाता है। 

"छन्द काव्य को स्मरण योग्य बना देता है।"
    छन्द के प्रत्येक चरण में वर्णों का क्रम अथवा मात्राओं की संख्या निश्चित होती है।
छन्द तीन प्रकार के माने जाते हैं।
१- वर्णिक 
२- मात्रिक और
‌३- मुक्त 
‌‌वर्णिक छन्द- 
      वर्णिक वृत्तों के प्रत्येक चरण का निर्माण वर्णों की एक निश्चित संख्या एवं लघु गुरू के क्रम के अनुसार होता है। वर्णिक वृत्तों में अनुष्टुप, द्रुतविलम्बित, मालिनी, शिखरिणी आदि छन्द प्रसिद्ध हैं।
मात्रिक छन्द- 
     मात्रिक छन्द वे होते हैं जिनकी रचना में चरण की मात्राओं की गणना की जाती है। जैसे दोहा, सोरठा, चौपाई, रोला आदि।
मुक्त छन्द- 
    हिन्दी में स्वतन्त्ररूप से आज लिखे जा रहे छन्द मुक्तछन्द की परिधि में आते हैं। जिनमें वर्ण या मात्रा का कोई बन्धन नही है। 
♥ मात्रा ♥
      वर्ण के उच्चारण में जो समय लगता है उसे मात्रा कहा जाता है। अ, इ, उ, ऋ के उच्चारण में लगने वाले समय की मात्रा ‍एक गिनी जाती है। आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ तथा इसके संयुक्त व्यञ्जनों के   उच्चारण में जो समय लगता है उसकी दो मात्राएँ गिनी जाती हैं। व्यञ्जन स्वतः उच्चरित नहीं हो सकते हैं। अतः मात्रा गणना स्वरों के आधार पर की जाती है।
मात्रा भेद से वर्ण दो प्रकार के होते हैं।
१- हृस्व और
२- दीर्घ
     हृस्व और दीर्घ को पिंगलशास्त्र में क्रमशः लघु और गुरू कहा जाता है।
♥ यति (विराम) ♥
     छन्द की एक लय होती है। उसे गति या प्रवाह कहा जाता है। लय का ज्ञान अभ्यास पर निर्भर करता है। छन्दों में विराम के नियम का भी पालन करना चाहिए। अतः छन्द के प्रत्येक चरण में उच्चारण करते समय मध्य या अन्त में जो विराम होता है उसे ही तो यति कहा जाता है।
♥ पाद (चरण) ♥
      छन्द में प्रायःचार पंक्तियाँ होती हैं। इसकी प्रत्येक पंक्ति को पाद कहा जाता है और इसी पाद को चरण कहते हैं। पहले और तीसरे चरण को विषम चरण और दूसरे तथा चौथे चरण को सम चरण कहा जाता है। उदाहरण के लिए-
नन्हें-मुन्नों के मन को,
मत ठेस कभी पहुँचाना।
नितप्रति कोमल पौधों पर, 
तुम स्नेह-सुधा बरसाना ।।
इस छन्द में चार पंक्तियाँ (चरण) हैं। हर एक पंक्ति चरण या पाद है। आजकल कुछ चार चरण वाले छन्दों को दो चरणों में लिखने की भी प्रथा चल पड़ी है।
--
कुछ मित्र अक्सर मेल करके यह पूछते हैं कि दोहा कैसे लिखा जाता है?
वे ध्यानपूर्वक इस रोचक वार्तालाप को पढ़िए!
आज मेरे एक “धुरन्धर साहित्यकार” मित्र की चैट आई- 
धुरन्धर साहित्यकार- शास्त्री जी नमस्कार! 
मैं- नमस्कार जी! 
धुरन्धर साहित्यकार- शास्त्री जी मैंने एक रचना लिखी है, देखिए! मैं- जी अभी देखता हूँ! 
(दो मिनट के् बाद) 
धुरन्धर साहित्यकार- सर! आपने मेरी रचना देखी! 
मैं- जी देखी तो है! 
क्या आपने दोहे लिखे हैं? 
धुरन्धर साहित्यकार- हाँ सर जी! 
मैं- मात्राएँ नही गिनी क्या? 
धुरन्धर साहित्यकार- सर गिनी तो हैं! 
मैं- मित्रवर! दोहे में 24 मात्राएँ होती हैं। पहले चरण में 13 तथा दूसरे चरण में ग्यारह! 
धुरन्धर साहित्यकार- हाँ सर जी जानता हूँ!(उदाहरण) 
( चलते-चलते थक मत जाना जी, 
साथी मेरा साथ निभाना  जी।) 
मैं- इस चरण में आपने मात्राएँ तो गिन ली हैं ना!  
धुरन्धर साहित्यकार- हाँ सर जी! चाहे तो आप भी गिन लो! 
मैं- आप लघु और गुरू को तो जानते हैं ना!  
धुरन्धर साहित्यकार- हाँ शास्त्री जी! 
मैं लघु हूँ और आप गुरू है!
मैं-वाह..वाह..आप तो तो वास्तव में धुरन्धर साहित्यकार हैं! 
धुरन्धर साहित्यकार- जी आपका आशीर्वाद है!  
मैं-भइया जी जिस अक्षर को बोलने में एक गुना समय लगता है वो लघु होता है और जिस को बोलने में दो गुना समय लगता है वो गुरू होता है!   
उदाहरण के लिए यह दोहा देखिए-
"विषय-वस्तु में सार होलेकिन हो लालित्य।
दुनिया को जो दे दिशावो ही है साहित्य।।"

      दोहा, मात्रिक अर्द्धसम छंद है। दोहे के चार चरण होते हैं। इसके 

विषम चरणों (प्रथम तथा तृतीय) में १३-१३ मात्राएँ और सम चरणों 

(द्वितीय तथा चतुर्थ) में ११-११ मात्राएँ होती हैं। विषम चरणों के आदि 

में जगण ( । ऽ । ) नहीं होना चाहिए। सम चरणों के अंत में एक गुरु 

और एक लघु मात्रा का होना आवश्यक होता है अर्थात अन्त में लघु 

होता है।

धुरन्धर साहित्यकार-सर जी आप बहुत अच्छे से समझाते हैं। मैंने तो उपरोक्त लाइन में केवल शब्द ही गिने थे! आपका बहुत-बहुत धन्यवाद!

21 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छा शास्त्री जी ! छंद वगैरा स्कूलों में पढ़ा था ,आज आपने उसकी याद दिला दी -बहुत अच्छा लगा
    latest postमेरे विचार मेरी अनुभूति: मेरी और उनकी बातें

    उत्तर देंहटाएं
  2. आभार सर । स्कूल में पढ़ा था लेकिन सब भूल गयी हूँ । कुछ भी याद नहीं की दोहे, चौपाई आदि में मात्राएँ कहाँ और कितनी होती हैं । आप्ने बताया - आभार आपका :)

    उत्तर देंहटाएं
  3. वाह!
    आपकी यह प्रविष्टि कल दिनांक 25-02-2013 को चर्चामंच-1166 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत ही बढिया से दी गई जानकारी

    उत्तर देंहटाएं
  5. मन के बहते राग छन्द हैं
    उड़ते संग विभाव छन्द हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत सुन्दर जानकारी दी है आपने !!

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  7. सरल और सार्थक !
    वाह सुंदर चैट !
    लघु और गुरू आ गया समझ में !

    उत्तर देंहटाएं
  8. हा हा हा --


    बढ़िया है गुरु जी-
    आभार ||

    उत्तर देंहटाएं
  9. आदरणीय गुरुदेव श्री बहुत ही सार्थक प्रस्तुति है जो अनभिज्ञ थे उन्हें इसका पूर्ण लाभ मिलेगा. बहुत ही सरलता से समझाया है आपने. आभार

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत ही सार्थक प्रस्‍तुति ...
    सादर आभार

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत जानकारी परक प्रस्तुति व्यंग्य विनोद लिए .सार लिए छंद के स्वरूप का .आभार .

    उत्तर देंहटाएं

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