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शुक्रवार, 22 फ़रवरी 2013

"स्वरावलि" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

‘‘‘’
‘‘‘’ से अल्पज्ञ सब, ओम् सर्वज्ञ है।
ओम् का जाप, सबसे बड़ा यज्ञ है।।

‘‘’’
‘‘’’ से आदि न जिसका, कोई अन्त है।
सारी दुनिया का आराध्य, वह सन्त है।।

‘‘’’
‘‘’’ से इमली खटाई भरी, खान है।
खट्टा होना खतरनाक, पहचान है।।

‘‘’’
‘‘’’ से ईश्वर का जिसको, सदा ध्यान है।
सबसे अच्छा वही, नेक इन्सान है।।

‘‘’’
उल्लू बन कर निशाचर, कहाना नही।
अपना उपनाम भी यह धराना नही।।

‘‘’’
ऊँट का ऊँट बन, पग बढ़ाना नही।
ऊँट को पर्वतों पर, चढ़ाना नही।।

‘‘’’
‘‘’’ से हैं वह ऋषि, जो सुधारे जगत।
अन्यथा जान लो, उसको ढोंगी भगत।।

‘‘’’
‘‘’’ से है एकता में, भला देश का।
एकता मन्त्र है, शान्त परिवेश का।।

‘‘’’
‘‘’’ से तुम ऐठना मत, किसी से कभी।
हिन्द के वासियों, मिल के रहना सभी।।

‘‘’’
‘‘’’ से बुझती नही, प्यास है ओस से।
सारे धन शून्य है, एक सन्तोष से।।

‘‘’’
‘‘’’ से औरों को पथ, उन्नति का दिखा।
हो सके तो मनुजता, जगत को सिखा।।

‘‘अं’’
‘‘अं’’ से अन्याय सहना, महा पाप है।
राम का नाम जपना, बड़ा जाप है।।

‘‘अः’’
‘‘अः’’ के आगे का स्वर,अब बचा ही नही।
इसलिए, आगे कुछ भी रचा ही नही।।

14 टिप्‍पणियां:

  1. अद्भुत , अति उत्तम , क्या कहे इस रचना के बारे में शब्द ही नहीं मेरे पास तो

    मेरी नई रचना


    खुशबू

    प्रेमविरह

    उत्तर देंहटाएं
  2. अति सुन्दर वर्णन..हर एक शब्दो की सुन्दर प्रस्तुति...वाह...

    उत्तर देंहटाएं
  3. वाह, दोहे के रूप में सीखने योग्य स्वरावलि।

    उत्तर देंहटाएं
  4. लाजबाब ,,,शब्दो की शानदार सुन्दर प्रस्तुति...वाह...क्या बात है ,,,

    Recent post: गरीबी रेखा की खोज

    उत्तर देंहटाएं

  5. सुन्दर प्रस्तुति |
    आभार ||

    उत्तर देंहटाएं
  6. वाह बहुत शानदार शिक्षात्मक रचना. शुभकामनाएं.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत सुंदर और सार्थक संदेश दिया स्वरावली ने

    उत्तर देंहटाएं
  8. आपकी स्वरवलि सहेजने योग्य है ...चैतन्य को अक्षरों का अर्थ बताने हेतु ....इससे बेहतर क्या होगा :)

    उत्तर देंहटाएं
  9. ्वाह गज़ब का प्रयोग किया है

    उत्तर देंहटाएं
  10. स्वर के माध्यम से बहुत बढ़िया प्रेरक प्रस्तुति ..धन्यवाद...

    उत्तर देंहटाएं

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