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शनिवार, 16 फ़रवरी 2013

"दो मुक्तक" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

शहनाइयों के शोर में, भी घोर मातम है।
हमारी अंजुमन में आज तनहाई का आलम है।
हबीबों की मजारों पर कोई सज़दा करेगा क्यों?
रकीबों की कतारें है जहाँ खुशियाँ बहुत कम हैं।।

गमजदा हो कर जुल्म को खूब सहते हैं।
थपेड़े सहन करके भी सदा खामोश रहते हैं।
नदी के दो किनारों को कभी मिलना नहीं होता।
मगर वो चूमकर मौजों को दिल की बात कहते हैं।।

17 टिप्‍पणियां:

  1. बढ़िया है मुक्तक-
    आभार गुरु जी -

    देख किनारों को लगे, मिलना है बेकार |
    जल जाएगा उड़ सकल, जो जाए उस पार |
    जो जाए उस पार, रूप का सतत आचमन |
    यह मुक्तक नवनीत, बाँचते दुर्जन सज्जन |
    ऐसे ही है ठीक, दूर ही रहना प्यारों |
    बना रहे अस्तित्त्व, करो उपकार किनारों ||

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

    उत्तर देंहटाएं
  3. गमजदा हो कर जुल्म को खूब सहते हैं।
    थपेड़े सहन करके भी सदा खामोश रहते हैं।
    यही तो सबसे बड़ी कमी है। खैर, उत्कृष्ट रचना !

    उत्तर देंहटाएं
  4. आपकी पोस्ट की चर्चा 17- 02- 2013 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है कृपया पधारें ।

    उत्तर देंहटाएं
  5. सुन्दर मुक्तक "शहनाइयों के शोर में, भी घोर मातम है।
    हमारी अंजुमन में आज तनहाई का आलम है।
    हबीबों की मजारों पर कोई सज़दा करेगा क्यों?
    रकीबों की कतारें है जहाँ खुशियाँ बहुत कम हैं।।....

    उत्तर देंहटाएं
  6. शहनाइयों के शोर में, भी घोर मातम है।
    हमारी अंजुमन में आज तनहाई का आलम है।
    हबीबों की मजारों पर कोई सज़दा करेगा क्यों?
    रकीबों की कतारें है जहाँ खुशियाँ बहुत कम हैं।।
    क्या खूब कहा हैं अपने बहुत सुन्दर
    दिनेश पारीक
    मेरी नई रचना फरियाद
    एक स्वतंत्र स्त्री बनने मैं इतनी देर क्यूँ

    उत्तर देंहटाएं
  7. दो मुक्तक" (डॉ.रूपचन्द्र सास्त्री 'मयंक')
    शहनाइयों के शोर में, भी घोर मातम है।
    हमारी अंजुमन में आज तनहाई का आलम है।
    हबीबों की मजारों पर कोई सज़दा करेगा क्यों?
    रकीबों की कतारें है जहाँ खुशियाँ बहुत कम हैं।।

    गमजदा हो कर जुल्म को खूब सहते हैं।
    थपेड़े सहन करके भी सदा खामोश रहते हैं।
    नदी के दो किनारों को कभी मिलना नहीं होता।
    मगर वो चूमकर मौजों को दिल की बात कहते हैं।।

    सार्थक मुक्तक .

    .सार्थक मुक्तक .अच्छा रूपक है नदी के दो किनारों का .

    उत्तर देंहटाएं
  8. क्या बात कही है शास्त्री जी.... बेहद खूबसूरत !

    उत्तर देंहटाएं

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