"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

शुक्रवार, 8 फ़रवरी 2013

"बदल रहा है ढंग" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मौसम के बदलाव सेबदल रहा है ढंग।
तोते-तोती पर चढ़ाप्रणयदिवस का  रंग।१।

गंगा मैली हो गईबहती दूषित धार।
चूनरिया अब लाज कीहुई तार-बेतार।२।

रोज-रोज लुटती यहाँमाँ-बहनों की लाज।
असभ्यता की दौड़ मेंशामिल हुआ समाज।३।

प्यार नहीं है वासनाये तो है उपहार।
जो आँखों में उमड़तावो है सच्चा प्यार।४।

मन के-मन के साथ मेंमिलते जहाँ विचार।
आपस का विश्वास हैरिश्तों का आधार।५।

बिना बात के हो जहाँआपस में तक़रार।
कभी न जीवन में करोऐसा ओछा प्यार।६।

मनमन्दिर में धार लो. प्रेमदिवस का सार।
जो जीवनभर निभ सकेवो होता है प्यार।७।

17 टिप्‍पणियां:

  1. मन के-मन के साथ में, मिलते जहाँ विचार।
    आपस का विश्वास है, रिश्तों का आधार।५।

    उम्दा बात ! बहुर सुन्दर !

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति प्रेम दिवस के साथ साथ सामाजिक बुराई को दर्शाया
    गुज़ारिश : ''......यह तो मौसम का जादू है मितवा......''

    उत्तर देंहटाएं

  3. मनमन्दिर में धार लो. प्रेमदिवस का सार।
    जो जीवनभर निभ सके, वो होता है प्यार।७।


    बसंत के संग मदनोत्सव के रंग .वेलेंटाइन डे की अप्रतिम पोस्ट .

    उत्तर देंहटाएं
  4. मौसम के बदलाव से, बदल रहा है ढंग।
    तोते-तोती पर चढ़ा, प्रणय दिवस का रंग,,,,,बहुत सुंदर अभिव्यक्ति,,


    RECENT POST: रिश्वत लिए वगैर...

    उत्तर देंहटाएं
  5. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा शनिवार (9-2-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
    सूचनार्थ!

    उत्तर देंहटाएं
  6. रोज-रोज लुटती यहाँ, माँ-बहनों की लाज।
    असभ्यता की दौड़ में, शामिल हुआ समाज।।
    समाज के लोगों के मुंह पर तमाचा है सर जी।
    बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति.....

    उत्तर देंहटाएं
  7. सुंदर प्रस्तुति शास्त्री सर!
    सच्चा प्यार वही है...जहाँ मन के मनके मिलें... :)
    ~सादर!!!

    उत्तर देंहटाएं
  8. प्यार निर्मल सा रहे, बेझिझक बहता रहे।

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुती,मन से मन का मिलन ही सच्चा प्यार होता है।

    उत्तर देंहटाएं
  10. बढ़िया भाव लिए है दोहावली गीत सा , भाई साहब .बेहतरीन रूपकात्मक्ता लिए हुए .शुक्रिया आपकी टिपण्णी का .

    मौसम के बदलाव से, बदल रहा है ढंग।
    तोते-तोती पर चढ़ा, प्रणयदिवस का रंग।१।

    गंगा मैली हो गई, बहती दूषित धार।
    चूनरिया अब लाज की, हुई तार-बेतार।२।

    उत्तर देंहटाएं
  11. shared to my profile at facebook with a link of the blog .Thanks https://www.facebook.com/rajeshjainrohtak

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails