"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

मंगलवार, 19 फ़रवरी 2013

"देश की कहानी" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


(चित्र गूगल छवियों से साभार)
होश गुम हैं, जोश है मन में भरा,
 यह हक़ीकत है, नहीं कोई कहानी।
अब यहाँ भी चल पड़ा है दौर ऐसा,
सिर्फ शब्दों में भरी सारी रवानी।।

खो गया है गाँव का परिवेश सारा,
हर तरफ है शहर का गन्दा नज़ारा,
घूमती चारों तरफ बिगड़ी जवानी।
सिर्फ शब्दों में भरी सारी रवानी।।

काठ भी तो बन गया है अब सुचालक,
अब नहीं मासूम लगता कोई बालक,
सभ्यता की अब नहीं बाकी निशानी।
सिर्फ शब्दों में भरी सारी रवानी।।

मन्दिरों में आज भ्रष्टाचार फैला,
भक्त-भक्ति का यहाँ उपहार मैला,
पड़ रही है लाज मीरा को बचानी।
सिर्फ शब्दों में भरी सारी रवानी।।

ज्ञान अब बिकने लगा है हाट में,
मखमली पैबन्द हैं अब टाट में,
लोकशाही में सजी है ख़ानदानी।
सिर्फ शब्दों में भरी सारी रवानी।।

12 टिप्‍पणियां:

  1. सही रचना जो आज की हकीक़त बयाँ करती हैं ....

    उत्तर देंहटाएं
  2. काठ भी तो बन गया है अब सुचालक,
    अब नहीं मासूम लगता कोई बालक,
    सभ्यता की अब नहीं बाकी निशानी।
    सिर्फ शब्दों में भरी सारी रवानी।।

    देश और दुनिया के हालात पर तीक्ष्ण दृष्टि. शुभकामनाएँ.

    उत्तर देंहटाएं
  3. सिर्फ शब्दों में भरी सारी रवानी-

    सही है गुरुदेव ||

    उत्तर देंहटाएं
  4. खो गया है गाँव का परिवेश सारा,
    हर तरफ है शहर का गन्दा नज़ारा,
    घूमती चारों तरफ बिगड़ी जवानी। ..

    वाह ... सत्य का चित्र खींच दिया आपने शास्त्री जी अंकों के सामने ...
    बहुत उम्दा प्रस्तुति ...

    उत्तर देंहटाएं
  5. मन्दिरों में आज भ्रष्टाचार फैला,
    भक्त-भक्ति का यहाँ उपहार मैला,
    उम्दा प्रस्तुति
    latestpost पिंजड़े की पंछी

    उत्तर देंहटाएं
  6. आज के हालात का सटीक चित्रण किया है।

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत ही सटीक कटाक्ष स्थितियों पर।

    उत्तर देंहटाएं
  8. बेहद सुन्दर कृति डाक्टर साब | बधाई |

    उत्तर देंहटाएं
  9. मन में हूक उठती है गर्दिशे दौर देख कर।

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails