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गुरुवार, 21 फ़रवरी 2013

"ग़ज़ल-ज़िन्दग़ी का सहारा" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


हमें जिसने ज़ुल्मों से मारा हुआ है। 
वही ज़िन्दग़ी का सहारा हुआ है।। 

जिसने सिखाया है दरिया को चलना
वो मौज़ों से घायल किनारा हुआ है। 

नहीं एक-दूजे के बिन काम चलता
हम उसके हैं और वो हमारा हुआ है। 

चुभन दे रहे हैं मगर प्यार भी है
गुलाबों को दिल से सँवारा हुआ है। 

मचलते हैं जब वो, महकते हैं तब हम,
उन्हीं के लिए "रूप" धारा हुआ है।

16 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर भावनायें और शब्द भी.बेह्तरीन अभिव्यक्ति!शुभकामनायें.

    उत्तर देंहटाएं
  2. हमें जिसने ज़ुल्मों से मारा हुआ है।
    वही ज़िन्दग़ी का सहारा हुआ है।। ... वाह शानदार आगाज गज़ब का मतला है

    जिसने सिखाया है दरिया को चलना,
    वो मौज़ों से घायल किनारा हुआ है। ... हाय हाय लाजवाब

    नहीं एक-दूजे के बिन काम चलता,
    हम उसके हैं और वो हमारा हुआ है। वाह शानदार

    चुभन दे रहे हैं मगर प्यार भी है,
    गुलाबों को दिल से सँवारा हुआ है। ... मस्त मदमस्त शे'र

    मचलते हैं जब वो, महकते हैं तब हम,
    उन्हीं के लिए "रूप" धारा हुआ है। .... अति सुन्दर

    आदरणीय गुरुदेव श्री सर सभी के सभी अशआर माशाल्लाह कमाल के हैं, सुन्दरता से परिपूर्ण शानदार ग़ज़ल हेतु दिली दाद के साथ-साथ हार्दिक बधाई भी स्वीकारें.

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति शुक्रवारीय चर्चा मंच पर ।।

    उत्तर देंहटाएं
  4. सुंदर भाव! सुंदर अभिव्यक्ति!
    ~सादर!!!

    उत्तर देंहटाएं
  5. क्या बात है , एक गजल महकती हुयी सी .....

    उत्तर देंहटाएं
  6. सभी शेर बहुत उम्दा, दाद स्वीकारें.

    उत्तर देंहटाएं
  7. दुश्मन जो दोस्तों से भी प्यारे हैं , जैसी कविता !

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत सुन्दर वहा वहा क्या बात है अद्भुत, सार्थक प्रस्तुरी
    मेरी नई रचना
    खुशबू
    प्रेमविरह

    उत्तर देंहटाएं
  9. बढ़िया बिम्ब है भाई साहब .


    जिसने सिखाया है दरिया को चलना,
    वो मौज़ों से घायल किनारा हुआ है।

    उत्तर देंहटाएं
  10. एक दूजे के लिए - अच्‍छी सोच है।

    उत्तर देंहटाएं

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