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रविवार, 3 जनवरी 2010

“पथ आलोकित है, आगे को बढ़ते जाओ!”

पथ आलोकित है, आगे को बढ़ते जाओ।।
उत्कर्षों के उच्च शिखर पर चढ़ते जाओ।
पथ आलोकित है, आगे को बढ़ते जाओ।।

पगदण्डी है कहीं सरल तो कहीं विरल है,
लक्ष्य नही अब दूर, सामने ही मंजिल है,
जीवन के विज्ञानशास्त्र को पढ़ते जाओ।
पथ आलोकित है, आगे को बढ़ते जाओ।।

अपने को तालाबों तक सीमित मत करना,
गंगा की लहरों-धाराओं से मत डरना,
आँधी, पानी, तूफानों से लड़ते जाओ।
पथ आलोकित है, आगे को बढ़ते जाओ।।

जो करता है कर्म, वही फल भी पाता है,
बिना परिश्रम नही निवाला भी आता है,
ज्ञाल सिन्धु से मन की गागर भरते जाओ।
पथ आलोकित है, आगे को बढ़ते जाओ।।

14 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत शानदार हौसला वर्धक रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  2. जो करता है कर्म, वही फल भी पाता है,
    बिना परिश्रम नही निवाला भी आता है,
    सार्थक पंक्तियाँ. सुन्दर रचना.
    ब्लोग का बदला हुआ कलेवर भी अच्छा लगा.

    उत्तर देंहटाएं
  3. प्रेरक गीत के लिए धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति है बच्चा ! कल्याण हो !

    उत्तर देंहटाएं
  5. जो करता है कर्म, वही फल भी पाता है,
    बिना परिश्रम नही निवाला भी आता है,
    बहुत सुंदर कविता शास्त्री जी.
    धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  6. अत्यंत उत्साहवर्धक काव्यरचना है

    उत्तर देंहटाएं
  7. बढ़िया उत्साहवर्धक गीत!

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत सुन्दर रचना
    बहुत बहुत बधाई .....

    उत्तर देंहटाएं
  9. जो करता है कर्म, वही फल भी पाता है,
    बिना परिश्रम नही निवाला भी आता है ...

    कर्म को प्रेरित करती .......... प्रभु कृष्ण की वाणी कहती लाजवाब रचना ............

    उत्तर देंहटाएं

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