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शुक्रवार, 22 जनवरी 2010

"सच्चे दोहे" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

मेरे कुछ दोहे-

रफा-दफा जब कर दिया, चोरी का सामान।
वापिस फिर से चाहता, बेईमान सम्मान।।

धमका रहा समुद्र को, खारा बिन्दु एक।
ज्वार जगाता सिऩ्धु में,किंकुड़िया को फेंक।।

सज्जनता की आड़ ले, शठ् करता आखेट।
कोतवाल को जाल में, डाकू रहा लपेट।।

कल तक जो मासूम था, आज हुआ बदनाम।
हया-शर्म रख ताक पर, बन बैठा शैतान।।

मन में भर कर छल-कपट, खूब उड़ाया माल।
एक मीन ने कर दिया, गन्दा सारा ताल।।

16 टिप्‍पणियां:

  1. चोर की ऐसी की तैसी, उसे कह दीजिये कि हम भी अपनी पे आ गए तो ...

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  2. सही कह रहे हैं आप. पर इस तरह निराश तो नही होना चाहिये. हम अपना प्रयत्न जारी रखेंगे. बकरे की मां कब तक खैर मनायेगी?

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  3. " behad saty kaha hai aapne

    रफा-दफा जब कर दिया, चोरी का सामान।
    वापिस फिर से चाहता, बेईमान सम्मान।।
    धमका रहा समुद्र को, खारा बिन्दु एक।
    ज्वार जगाता सिऩ्धु में,किंकुड़िया को फेंक।।

    TAU ne bilkul ssahi kaha hai

    ----- eksacchai { AAWAZ }

    http://eksacchai.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  4. बिलकुल सही कहा आपने .... एक मच्छली सारे तालाब को गन्दा कर देती है .... एक तो चोरी ऊपर से सीना ज़ोरी....

    उत्तर देंहटाएं
  5. सही कहा एकदम ..चोरी से कबतक एठेगा
    धमका रहा समुद्र को, खारा बिन्दु एक।
    ज्वार जगाता सिऩ्धु में,किंकुड़िया को फेंक।

    उत्तर देंहटाएं
  6. द्विवेदी जी को पत्र लिखें और इस ओर ध्यान आकर्षित करवाईये.

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत अच्छा लगा सारे दोहे! बधाई!

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  8. अपनी पे आप आ भी गये तो आप क्या कर लोगे गोदियाल जी ?..आप के पास माल था इसलिए चोर ने चुरा लिया अब आप क्या चोर के घर से क्या चुरायेंगे ?
    हा हा हा हा

    सबसे अच्छा ये है कि वह व्यक्ति सार्वजनिक रूप से मुआफी मांगे मयंक जी से...............

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  9. चौर्य कर्म भी एक कला है :). बाकी सबक तो मिलना ही चाहिये. छोड़ देने से हौसला बढ़ता है.

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  10. मयंक जी किसी एक दो दोहे को कहना नहीं चाहती क्यों कि मुझे सभी दोहे लाजवाब लगे हैं एक से बढ कर एक बधाई

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  11. रफा-दफा जब कर दिया, चोरी का सामान।
    वापिस फिर से चाहता, बेईमान सम्मान।।
    आप ने बहुत सही कहा है कि अब साधू के रुप मै आना चाहता है शैतान
    हम सब आप के संग है

    उत्तर देंहटाएं
  12. जितनी तारीफ़ करें कम है एक से बढ़कर एक दोहे...लाज़वाब रचना..बधाई शास्त्री जी!!

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  13. किसी एक की तारीफ में कुछ कहना दूसरे के साथ अन्‍याय होगा, अनुपम प्रस्‍तुति के लिये आभार ।

    उत्तर देंहटाएं

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