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शनिवार, 23 जनवरी 2010

“नवगीत” (ड़ॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”

छा रहा मधुमास में,


कुहरा घना है।



15012010052 (1)2


दिन दुपहरी में दिवाकर अनमना है।
छा रहा मधुमास में कुहरा घना है।।

नीड़ में अब भी परिन्दे सो रहे,
फाग का शृंगार कितना है अधूरा,
शीत से हलकान बालक हो रहे,
चमचमाती रौशनी का रूप भूरा



रश्मियों के शाल की आराधना है।


छा रहा मधुमास में कुहरा घना है।।



सेंकता है आग फागुन में बुढ़ापा,
चन्द्रमा ने ओढ़ ली मोटी रजाई,
खिल नही पाया चमन ऋतुराज में,
टेसुओं ने भी नही रंगत सजाई,

कोप सर्दी का हवाओं में बना है।
छा रहा मधुमास में कुहरा घना है।।

11 टिप्‍पणियां:

  1. जबाव नहीं आपका. हर विषय पर अच्छी कविता रचते हैं. वाह.

    उत्तर देंहटाएं
  2. अद्भुत! बिम्बों का सुंदर प्रयोग!!
    सेंकता है आग फागुन में बुढ़ापा,
    चन्द्रमा ने ओढ़ ली मोटी रजाई,
    खिल नही पाया चमन ऋतुराज में,
    टेसुओं ने भी नही रंगत सजाई,

    उत्तर देंहटाएं
  3. सेंकता है आग फागुन में बुढ़ापा,
    चन्द्रमा ने ओढ़ ली मोटी रजाई,

    बहुत सुंदर अनुभूति हैं ये. आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  4. मयंक जी शर्दी की मार तो हम भी झेल रहे है मगर आप ने मौसम् का जीता सजीव चित्रण किया है बहुत बेहतरीन
    सादर
    प्रवीण पथिक
    9971969084

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत लाजवाब अभिव्यक्ति.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  6. नीड़ में अब भी परिन्दे सो रहे,
    फाग का शृंगार कितना है अधूरा,
    शीत से हलकान बालक हो रहे,
    चमचमाती रौशनी का रूप भूरा
    सेंकता है आग फागुन में बुढ़ापा,
    चन्द्रमा ने ओढ़ ली मोटी रजाई,
    खिल नही पाया चमन ऋतुराज में,
    टेसुओं ने भी नही रंगत सजाई,


    बहुत सुंदर पंक्तियाँ....

    उत्तर देंहटाएं
  7. " bahut hi khubsurat rachana sir .."

    ---- eksacchai { AAWAZ }

    http://eksacchai.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  8. छा रहा मधुमास में कुहरा घना है ... ... .
    नीड़ में अब भी परिन्दे सो रहे ... ... .
    रश्मियों के शाल की आराधना है ... ... .
    चन्द्रमा ने ओढ़ ली मोटी रजाई ... ... .
    --
    इस सुंदर रचना में
    मौसम के बहुत सुंदर चित्र खींचे गए हैं!

    उत्तर देंहटाएं
  9. अत्यंत सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ आपने लाजवाब रचना लिखा है! बहुत अच्छा लगा!

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत सुंदर रचना, शास्त्री जी दो चार कविताये चोर उच्च्को पर भी लिख दे, जो पहले चोरी करते है ओर फ़िर बेशर्मो की तरह सीना जोरी करते है

    उत्तर देंहटाएं

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