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शनिवार, 9 जनवरी 2010

"हो गया क्यों देश ऐसा ?" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

आज एक पुराना गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ-
कल्पनाएँ डर गयी हैं ,
भावनाएँ मर गयीं हैं,

देख कर परिवेश ऐसा।

हो गया क्यों देश ऐसा ??


पक्षियों का चह-चहाना ,

लग रहा चीत्कार सा है।

षट्पदों का गीत गाना ,

आज हा-हा कार सा है।

गीत उर में रो रहे हैं,

शब्द सारे सो रहे हैं,

देख कर परिवेश ऐसा।

हो गया क्यों देश ऐसा ??


एकता की गन्ध देता था,

सुमन हर एक प्यारा,

विश्व सारा एक स्वर से,

गीत गाता था हमारा,

कट गये सम्बन्ध प्यारे,

मिट गये अनुबन्ध सारे ,

देख कर परिवेश ऐसा।

हो गया क्यों देश ऐसा ??


आज क्यों पागल,

स्वदेशी हो गया है ?

रक्त क्यों अपना,

विदेशी हो गया है ?

पन्थ है कितना घिनौना,

हो गया इन्सान बौना,

देख कर परिवेश ऐसा।

हो गया क्यों देश ऐसा ??


आज भी लोगों को,

पावस लग रही है ,

चाँदनी फिर क्यों,

अमावस लग रही है ?

शस्त्र लेकर सन्त आया,

प्रीत का बस अन्त आया,

देख कर परिवेश ऐसा।

हो गया क्यों देश ऐसा ??


13 टिप्‍पणियां:

  1. आज क्यों पागल,
    स्वदेशी हो गया है ?
    रक्त क्यों अपना,
    विदेशी हो गया है ?
    पन्थ है कितना घिनौना,
    हो गया इन्सान बौना,
    देख कर परिवेश ऐसा।
    हो गया क्यों देश ऐसा ??

    इन पंक्तियों ने दिल को छू लिया... बिलकुल सही कहा आपने...

    सटीक और सार्थक कविता....


    आभार....

    उत्तर देंहटाएं
  2. देश बस ऐसा ही हो गया है..कुछ कुछ आधा अधूरा सा हर चीज़..और लोग भी बहुत बदल रहे है..सुंदर भाव..धन्यवाद शास्त्री जी

    उत्तर देंहटाएं
  3. कविता इतनी मार्मिक है कि सीधे दिल तक उतर आती है।

    उत्तर देंहटाएं
  4. क्योकि हम लालची बन गये है, भर्ष्ट हो गये है, ओर यह देश हम से ही बना है, आप ने बहुत सुंदर लिखा. धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  5. जिन्हें नाज़ है हिंद पर,
    कहां हैं, कहां हैं, कहां हैं...

    जय हिंद...

    उत्तर देंहटाएं
  6. विश्व सारा एक स्वर से,

    गीत गाता था हमारा,

    कट गये सम्बन्ध प्यारे,

    मिट गये अनुबन्ध सारे ,

    देख कर परिवेश ऐसा।

    हो गया क्यों देश ऐसा ?

    बहुत सुन्दर

    उत्तर देंहटाएं
  7. आज भी लोगों को,

    पावस लग रही है ,

    चाँदनी फिर क्यों,

    अमावस लग रही है ?

    शस्त्र लेकर सन्त आया,

    प्रीत का बस अन्त आया,

    देख कर परिवेश ऐसा।

    हो गया क्यों देश ऐसा ??

    bahut sunder shastri ji, aaj ke haalaat ka behatareen shabd chitra kheencha hai, badhaai, aap theek kahte hain , purane chavlon ki mahak ka maza hi kuchh aur hai.

    उत्तर देंहटाएं
  8. आज भी लोगों को,
    पावस लग रही है ,
    चाँदनी फिर क्यों,
    अमावस लग रही है ?
    शस्त्र लेकर सन्त आया,
    प्रीत का बस अन्त आया,
    देख कर परिवेश ऐसा।
    हो गया क्यों देश ऐसा ??

    bahut hi sundar.Badhai!!

    उत्तर देंहटाएं
  9. waakai....ho gaya kyon desh aisa....

    sahi aaeena dikhati hui aapki ye rachna..


    aabhar

    mulhid

    उत्तर देंहटाएं
  10. पक्षियों का चह-चहाना ,

    लग रहा चीत्कार सा है।

    षट्पदों का गीत गाना ,

    आज हा-हा कार सा है।

    गीत उर में रो रहे हैं,

    शब्द सारे सो रहे हैं,

    देख कर परिवेश ऐसा।

    हो गया क्यों देश ऐसा ??


    bahut hi marmikta se halat ka varnan kiya hai .........aap soye huyon ko aise hi jagate rahiye.

    उत्तर देंहटाएं

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