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बुधवार, 6 जनवरी 2010

“ब्लॉगर्स की शाम : ग़ज़ल के नाम” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

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आज की शाम ग़ज़ल के सशक्त हत्ताक्षर ज़नाब सग़ीर अशरफ़ साहब के सम्मान में “उच्चारण” के बैनर तले एक गोष्ठी का आयोजन किया गया।
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पूर्व में उत्तराखण्ड के साहित्य-जगत में अपना लोहा मनवाने के बाद अब उत्तर प्रदेश के नूरपुर (जनपद:बिजनौर) निवासी पोस्टमास्टर(H.S.G.-II) के पद से सेवा-निवृत्त शायर, पत्रकार व साहित्यकार सग़ीर अशरफ़
अपनी ग़ज़ल सुनाते हुए -
मैं अपने घर से तेरा दर तलाश करता हूँ,
तेरे करम का समन्दर तलाश करता हूँ।
बिछुड़ गया हूँ मैं अपनी हसीन दुनिया से,
तुझे ऐ ज़िन्दगी छूकर तलाश करता हूँ।
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ब्लॉगजगत के सुपरिचित हस्ताक्षर और
कर्मनाशा के नियंत्रक
डॉ. सिद्धेश्वर सिंह ग़ज़ल सुनाते हुए -

आइए एक खत लिखें हम जिंदगी के नाम.
उम्र की ना - आशना आवारगी के नाम.
जब कयामत आएगी तो मैं बचाना चाहूंगा,
उसकी खुशबू, उसके किस्से, उस परी के नाम.
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बच्चों को समर्पित ब्लॉग “सरस पायस” के संपादक रावेन्द्रकुमार रवि ग़ज़ल सुनाते हुए -

जब तुम हमें लुभाने निकले!
हम तुम पर मिट जाने निकले!
तुम पर अच्छी ग़ज़ल पढ़ी तो,
हम दिल से कुछ गाने निकले!
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अन्त मे उच्चारण के नियन्त्रक
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक” ने अपनी ग़ज़ल प्रस्तुत की-

अब हवाओं में फैला गरल ही गरल।
क्या लिखूँ ऐसे परिवेश में गजल।।
आम, जामुन जले जा रहे, आग में,
विष के पादप पनपने, लगे बाग मे,
आज बारूद के, ढेर पर बैठ कर-
ढूँढते हैं सभी, प्यार के चार पल।
क्या लिखूँ ऐसे परिवेश में गजल।।

19 टिप्‍पणियां:

  1. Shukriya achcha laga tamaam ghazalkaron ke in ashaaron ko padh kar.

    उत्तर देंहटाएं
  2. आज बारूद के, ढेर पर बैठ कर-


    ढूँढते हैं सभी, प्यार के चार पल।


    क्या लिखूँ ऐसे परिवेश में गजल।।


    -बहुत शानदार.

    सभी गज़ले बहुत उम्दा लगी.

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपने कुछ ना लिखने की बात कह कर भी बहुत कुछ कह गये..बढ़िया प्रस्तुति आभार शास्त्री जी!!

    उत्तर देंहटाएं
  4. आपकी प्रस्तुति और ग़ज़ल दोनों ही अच्छी लगी !

    उत्तर देंहटाएं
  5. आम, जामुन जले जा रहे, आग में,
    विष के पादप पनपने, लगे बाग मे,
    आज बारूद के, ढेर पर बैठ कर-
    ढूँढते हैं सभी, प्यार के चार पल।
    क्या लिखूँ ऐसे परिवेश में गजल

    वाह, बेहद ख़ूबसूरत रचना शास्त्री जी !

    उत्तर देंहटाएं
  6. bahut badhiya aayojan aur aapki gazal bhi usi ke anuroop utni hi umda.

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत ही खूबसूरत ग़ज़लों का गुलदस्ता है ये पोस्ट ..............

    उत्तर देंहटाएं
  8. एक सार्थक प्रयास. आप स्वस्थ व दीर्घायु होकर साहित्य की सेवा करते रहें यही प्रार्थना व कामना है.

    उत्तर देंहटाएं
  9. अब हवाओं में फैला गरल ही गरल।
    क्या लिखूँ ऐसे परिवेश में गजल।।
    ----------------
    सुन्दर!
    हवा में ताकत होती है परिमित मात्रा में गरल शोधन की। उसी शोधन क्षमता पर भरोसा किया जाये।

    उत्तर देंहटाएं

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