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रविवार, 31 जनवरी 2010

“आया मधुमास!” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

फागुन की फागुनिया लेकर, आया मधुमास!

फागुन की फागुनिया लेकर, आया मधुमास!
पेड़ों पर कोपलियाँ लेकर, आया मधुमास!!

धूल उड़ाती पछुआ चलती, जिउरा लेत हिलोर,
देख खेत में सरसों खिलती, नाचे मन का मोर,
फूलों में पंखुड़िया लेकर, आया मधुमास!
पेड़ों पर कोपलियाँ लेकर, आया मधुमास!!

निर्मल नभ है मन चञ्चल है, सुधरा है परिवेश,
माटी के कण-कण में, अभिनव उभरा है सन्देश,
गीतों में लावणियाँ लेकर, आया मधुमास!
पेड़ों पर कोपलियाँ लेकर, आया मधुमास!!

छम-छम कानों में बजती हैं गोरी की पायलियाँ,
चहक उठी हैं, महक उठी हैं, सारी सूनी गलियाँ,
होली की रागनियाँ लेकर, आया मधुमास!
पेड़ों पर कोपलियाँ लेकर, आया मधुमास!! 
(चित्र गूगल सर्च से साभार)

13 टिप्‍पणियां:

  1. कल का भजन भी बहुत अच्छा था और आज मधुमास की तारीफ के साथ पीले फूलों ने चार चांद लगा दिये.

    उत्तर देंहटाएं
  2. छम-छम कानों में बजती हैं गोरी की पायलियाँ,
    चहक उठी हैं, महक उठी हैं, सारी सूनी गलियाँ,
    अद्भुत! शब्दचित्र ने मन मोह लिया!

    उत्तर देंहटाएं
  3. शास्त्रीजी,
    पन्त जी की कविता पंक्ति की याद दिला दी आपने :
    'उड़ती भीनी तैलाक्त गंध, फूली सरसों पीली-पीली !
    लो, हरित धरा से झांक रही, नीलम की कलि तीसी नीली !!'
    सच है, मधुमास में मन का मोर नाच उठता है.
    सादर--आ.

    उत्तर देंहटाएं
  4. होली की रागनियाँ लेकर आया है मधुमास!
    पेड़ों पर कोपलियाँ लेकर आया है मधुमास!!

    -सुन्दर गीत, बधाई.

    उत्तर देंहटाएं
  5. होली की रागनियाँ लेकर आया है मधुमास!
    पेड़ों पर कोपलियाँ लेकर आया है मधुमास!! .nice

    उत्तर देंहटाएं
  6. छम-छम कानों में बजती हैं गोरी की पायलियाँ,
    चहक उठी हैं, महक उठी हैं, सारी सूनी गलियाँ,
    होली की रागनियाँ लेकर आया है मधुमास!
    पेड़ों पर कोपलियाँ लेकर आया है मधुमास!!

    अति सुन्दर , बहुत खूब !

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत ख़ूबसूरत गीत! आनंद आ गया!

    उत्तर देंहटाएं
  8. bahut hi sundar bilkul madhumas sa geet likha hai..........badhayi.

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  9. वाह!शास्त्री जी इस गीत मे तो साक्षात मधुमास उतर आया है, ॠतुराज के साथ। आभार

    उत्तर देंहटाएं

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