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गुरुवार, 14 जनवरी 2010

सुरेन्द्र "मुल्हिद" की एक ग़ज़ल (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

surender chawla मुझे
शास्त्री जी,
आपके चरणों में सादर प्रणाम अर्पण करता हूँ, जब से मालूम चला है की आपकी रचनाएँ कोई चोरी कर के अपने ब्लॉग पर लगा रहा है, तब से ही मैं सोच रहा हूँ की कैसे शब्दों को कागज़ पे उतार के अपनी वेदना का व्याख्यान करूँ!

My Photoसुरेन्द्र "मुल्हिद"

  • Age: 30
  • Gender: Male
  • Astrological Sign: Virgo
  • Zodiac Year: Sheep
  • Industry: Telecommunications
  • Occupation: head-change management
  • Location: gurgaon : haryana : India
  • Blog: my own creation
  • शास्त्री जी,

    ब्लॉग चोरी के खिलाफ मुहिम में मैं आपके साथ हूँ, और इसी लिए अपनी एक तुच्छ रचना आपके उच्चारण के लिए प्रस्तुत कर रहा हूँ!

    आशा करता हूँ आपके सभी प्रशंसकों को पसंद आएगी!


    आभार!


    सुरेन्द्र "मुल्हिद"


    पेश है:


    "ये कोई क्या कर के चलता बना"


    कितनी शिद्दत से मैंने कुछ आफ्रीनिशें(१) लिखीं,


    कोई और उन्हें अपना बना के चलता बना,


    गम्माज्गिरी(२) मेरे सीने में कर के वो,


    गोया ही अपना बना के चलता बना,


    न जाने कितने गहरे सोच के पुलिंदे बांधे,


    कोई डाकिया बने उन्हें समेट चलता बना,


    उसकी रूह को भी ख़याल-इ-पारसाई(३) न रहा,


    बे-गैरती में अपना ब्लॉग सजा के चलता बना,


    मेरी नज्में जो मेरे सजदों की हर पल जानिब हैं,


    वो बे-परवाह खुदा से दीगर(४) कर चलता बना,


    दुआ करता हूँ उसकी ईमाँ से वस्ल(५) मुक़र्रर हो,


    जो खुद को ही दग़ा दे के यूँ चलता बना!


    **************************************


      (१) रचनाएँ (२) छुरा भोंकना (३) आत्म सम्मान का ख्याल (४) दूर (५) मुलाकात


      **************************************


      शुक्रिया!

8 टिप्‍पणियां:

  1. पीड़ा जब भरती है हृदय मे,साथ ही अरमा भी मचलता है।
    वो क्या जाने एक रचना मे,कितना खुन-पसीना जलता है॥

    उत्तर देंहटाएं
  2. साथ देने के लिये बहुत धन्यवाद भाई सुरेंद्र "मुल्हिद" जी को.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुरेन्द्र "मुल्हिद"जी की रचना बहुत सुंदर, आप दोनो का धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  4. surendra ji ne bahut badhiya likha hai unke antarman ki aawaz sunayi de rahi hai.

    उत्तर देंहटाएं

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