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शुक्रवार, 1 जनवरी 2010

“कुछ दोहे”

जन्म लिया जिस देश में, खाया जिसका अन्न।
इसको हिंसा-लूट से, करना नही विपन्न।।
भाषा, धर्म, प्रदेश से, ऊपर होता देश।
भेदभाव, असमानता, से बढ़ता है क्लेश।।
वृक्ष धरोहर धरा की, इन्हे बचाना धर्म।
प्राण वायु के दूत ये, समझो इनका मर्म।।
माता-पिता, बुजुर्ग का, जिस घर में सम्मान।
उस घर में बसते स्वयं, साक्षात् भगवान।।
सादे जीवन में सदा, होते उच्च विचार।
तड़क-भड़क में जन्मते, अनाचार-व्यभिचार।।

14 टिप्‍पणियां:

  1. माता-पिता, बुजुर्ग का, जिस घर में सम्मान।
    उस घर में बसते स्वयं, साक्षात् भगवान।।
    सभी दोहे काफी सारगर्भित। आपको नव वर्ष 2010 की हार्दिक शुभकामनाएं।

    उत्तर देंहटाएं
  2. एक बहुत सुंदर प्रस्तुति पर और नववर्ष पर हार्दिक बधाई आप व आपके परिवार की सुख और समृद्धि की कामना के साथ
    सादर रचना दीक्षित

    उत्तर देंहटाएं
  3. माता-पिता, बुजुर्ग का, जिस घर में सम्मान।
    उस घर में बसते स्वयं, साक्षात् भगवान।।
    बहुत सुंदर रचना
    आप को ओर आप के परिवार को नववर्ष की बहुत बधाई एवं अनेक शुभकामनाए

    उत्तर देंहटाएं
  4. नए वर्ष २०१० के शुभारम्भ के लिए इससे बेहतर और कोई शुरूआत नहीं हो सकती थी /

    परन्तु क्या वो नन्मान्य नेता जो देश की बागडोर हाथो में थामते है वो भी क्या आपके ब्लॉग को पढ़ते होंगे यदि कोई एक दो भी पढ़े और गुने तो कुछ तो भला देश का हो ही जाएगा / खैर , नया वर्ष मुबारक हो आपको /

    उत्तर देंहटाएं
  5. अति उत्तम संदेश छिपा है आपके दोहों में. सवाल उन्हें जीवन में उतारने का है.

    उत्तर देंहटाएं
  6. सुंदर दोहे और भी सार्थक विचारों के साथ ..बहुत बढ़िया प्रस्तुति हर दोहे एक अच्छी बात कह रहे है...बहुत सुंदर बधाई!!

    उत्तर देंहटाएं
  7. शास्त्री जी,सभी दोहे बहुत सुन्दर हैं बधाई स्वीकारें।

    उत्तर देंहटाएं
  8. भाषा, धर्म, प्रदेश से, ऊपर होता देश।
    भेदभाव, असमानता, से बढ़ता है क्लेश।।

    काश ठाकरे के पिल्ले और देवबंद के मुल्ले इसे पढ़ पाते !

    उत्तर देंहटाएं
  9. Aap jo bhi likhte ho wo gahre sandesh liye hota hai... Pranaam sweekaare...!

    उत्तर देंहटाएं

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