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सोमवार, 4 जनवरी 2010

"भारत देश हमारा प्यारा" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

बाल-गीत

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भारत देश हमारा प्यारा।


सब देशों से है यह न्यारा्।।


गिरजाघर में प्रभु का गान।


मस्जिद में हो रही अजान।।


कथा हो रही चौबारों में।


गुरूवाणी है गुरूद्वारों में।।


मन्दिर में हो रही आरती।


धन्य-धरा हो रही भारती।।


पण्डित जी घिसते हैं चन्दन।


सबके अपने पूजन-वन्दन।।


दृष्टिकोण मानवतावादी।


यहाँ इबादत की आजादी।।


हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई।


सब आपस में भाई-भाई।।


प्यार और सम्मान यहाँ है।


सब धर्मों का मान यहाँ है।।


हम सबकी आँखों का तारा।


भारत देश हमारा प्यारा।।

13 टिप्‍पणियां:

  1. देशभक्ति से ओत-प्रोत एक बहुत हू सुंदर रचना...पूरी तरह से भारत की संस्कृति झलकती है आपकी इस कविता में..बहुत सुंदर सुंदर भाव..बधाई शास्त्री जी!!!

    उत्तर देंहटाएं
  2. ये तो बहुत सुन्दर देश-भक्ति गीत है.

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत अच्छा लगा यह देश-भक्ति का बाल गीत

    उत्तर देंहटाएं
  4. शास्त्री जी,बहुत ही सुन्दर बालगीत है। देशभक्ति से ओत-प्रोत ।बहुत अच्छा लगा।धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  5. सुन्दर रचना.

    --


    ’सकारात्मक सोच के साथ हिन्दी एवं हिन्दी चिट्ठाकारी के प्रचार एवं प्रसार में योगदान दें.’

    -त्रुटियों की तरफ ध्यान दिलाना जरुरी है किन्तु प्रोत्साहन उससे भी अधिक जरुरी है.

    नोबल पुरुस्कार विजेता एन्टोने फ्रान्स का कहना था कि '९०% सीख प्रोत्साहान देता है.'

    कृपया सह-चिट्ठाकारों को प्रोत्साहित करने में न हिचकिचायें.

    -सादर,
    समीर लाल ’समीर’

    उत्तर देंहटाएं
  6. bahut sunder geet hai ..ekdam jaisa school main gaya karte the.

    उत्तर देंहटाएं
  7. दृष्टिकोण मानवतावादी।


    यहाँ इबादत की आजादी।।


    हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई।

    सब आपस में भाई-भाई।।

    बहुत सुन्दर, नया हेडर भी बहुत प्यारा लगाया है शास्त्री जी !

    उत्तर देंहटाएं
  8. देश प्रेम को प्रेरित करती बेहद सुंदर रचना .......... बधाई शास्त्री जी ..........

    उत्तर देंहटाएं

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