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शुक्रवार, 8 जनवरी 2010

"हम हृदय में प्यार लेकर आ रहे हैं।" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

प्रीत और मनुहार लेकर आ रहे हैं।
हम हृदय में प्यार लेकर आ रहे हैं।।

गाँव का होने लगा शहरीकरण,
सब लुटे किरदार लेकर आ रहे हैं।
हम हृदय में प्यार लेकर आ रहे हैं।।

मत प्रदूषित ताल में गोता लगाना,
हम नवल जल धार लेकर आ रहे है।
हम हृदय में प्यार लेकर आ रहे हैं।।

जिन्दगी में फिर बहारें आयेंगी,
हम सुमन के हार लेकर आ रहे हैं।
हम हृदय में प्यार लेकर आ रहे हैं।।

15 टिप्‍पणियां:

  1. गाँव का होने लगा शहरीकरण,
    दम घुटे किरदार लेकर आ रहे हैं।
    हम हृदय में प्यार लेकर आ रहे हैं।

    सुंदर विचारों से सजी एक खूबसरत कविता..अतिसुंदर धन्यवाद शास्त्री जी इस सुंदर प्रस्तुति के लिए..

    उत्तर देंहटाएं
  2. isse achhi kya bat ho skti hai ki ham pyar lekar aa rhe hai .
    bahut sundar kvita

    उत्तर देंहटाएं
  3. चौथी पंक्ति पढ़ कर ऐसा लगा
    किराएदार लेकर आ रहे हैं
    दिल में बसाने को यार आ रहे हैं
    प्‍यार लेकर बेशुमार आ रहे हैं
    हम प्‍यारे के मारे हुए हैं
    प्‍यार से ही होंगे जिंदा
    हमें जिंदा करने हमारे यार आ रहे हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  4. waah waah............badi hi gazab ki rachna likhi hai..........badhayi.

    उत्तर देंहटाएं
  5. गाँव का होने लगा शहरीकरण,
    सब लुटे किरदार लेकर आ रहे हैं ...

    सत्य की अभिव्यक्ति ......... काड़ुवा सच है .....

    उत्तर देंहटाएं
  6. आपको और आपके परिवार को नए साल की हार्दिक शुभकामनायें!
    बहुत बढ़िया रचना लिखा है आपने!

    उत्तर देंहटाएं
  7. आशान्वित होना अच्छा है. लेकिन उम्मीद कम है.

    उत्तर देंहटाएं

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