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बुधवार, 27 जनवरी 2010

“मौसम डूबा प्यार में” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

Prasad9686-UA2-blog-2834 (1)
कल तक था ऋतुराज पड़ा, कुहरे के कारागार में।
आज गुनगुनी धूप सेंककर, मौसम डूबा प्यार में।।

भँवरे गुन-गुन करते आते,
कलियों को संगीत सुनाते,
कंगाली गुलशन से भागी,
पौधों की किस्मत है जागी.
प्रेमी मग्न हुए हैं फिर से, प्रेम-प्रीत मनुहार में।
आज गुनगुनी धूप सेंककर, मौसम डूबा प्यार में।।
Flowers-Wallpaper-e9
सुबह-सवेरे चिड़ियाँ बोली,
कानों में मिश्री सी घोली,
गेहूँ पर बालियाँ झूलतीं,
सरसों की डालियाँ फूलतीं,
नई-नई कोंपलें आ गईं, सेंमल और कचनार में।
आज गुनगुनी धूप सेंककर, मौसम डूबा प्यार में।।

शीतकाल का अन्त हो गया,
कितना सुखद बसन्त हो गया,
कोयल ने आवाज लगाई,
कौए ने पाँखें खुजलाई.
गीतों ने कुण्डी खटकाई, उर मन्दिर के द्वार में।
आज गुनगुनी धूप सेंककर, मौसम डूबा प्यार में।।

(चित्र गूगल सर्च से साभार)

19 टिप्‍पणियां:

  1. नई-नई कोंपलें आ गईं, सेंमल और कचनार में।
    आज गुनगुनी धूप सेंककर, मौसम डूबा प्यार में।।


    बहुत ही सुन्दर रचना है

    बधाई स्वीकारे

    उत्तर देंहटाएं
  2. शीतकाल का अन्त हो गया,
    सुखदायी बसन्त हो गया,
    कोयल ने आवाज लगाई,
    कौए ने पाँखें खुजलाई.

    बहुत पसंद आया डा0 साहिब। धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  3. आभार शास्त्री जी आपकी लेखनी को नमन - ऋतुराज के आगमन को आपने साकार कर दिया.

    उत्तर देंहटाएं
  4. आज गुनगुनी धूप सेंककर, मौसम डूबा प्यार में।nice

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर रचना है बधाई आपको वसंतोत्सव की

    उत्तर देंहटाएं
  6. गीतों ने कुण्डी खटकाई, उर मन्दिर के द्वार में।
    आज गुनगुनी धूप सेंककर, मौसम डूबा प्यार में।।

    -बहुत सुन्दर गीत!! आनन्द आया.

    उत्तर देंहटाएं
  7. आदरणीय,
    इतनी सुन्दर मोहित कर देने वाली आपकी रचना श्रेष्ठ है !!
    बधाई ..!!

    http://kavyamanjusha.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  8. सरलता और सहजता का अद्भुत सम्मिश्रण बरबस मन को आकृष्ट करता है।

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत सुंदर रचना, ओर चित्र भी बहुत लुभावने, धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  10. ख़ूबसूरत चित्रों के साथ आपने लाजवाब रचना लिखा है जो बेहद पसंद आया! बधाई!

    उत्तर देंहटाएं
  11. सुबह-सवेरे चिड़ियाँ बोली,
    कानों में मिश्री सी घोली,
    गेहूँ पर बालियाँ झूलतीं,
    सरसों की डालियाँ फूलतीं,
    नई-नई कोंपलें आ गईं, सेंमल और कचनार में।
    आज गुनगुनी धूप सेंककर, मौसम डूबा प्यार में।

    मौसम की खुमारी को... बहुत ही सुंदर शब्दों में बयान किया है आपने....



    --
    www.lekhnee.blogspot.com


    Regards...


    Mahfooz..

    उत्तर देंहटाएं
  12. वाह बहुत सुंदर रचना है .. वसंत के स्‍वागत में !!

    उत्तर देंहटाएं
  13. waah waah.........bahut hi sundar mausmi geet suna diya aaj to........bilkul mausam ki tahan gunguna.

    उत्तर देंहटाएं
  14. आज सुनहरी धूप और ऊपर से आपकी सुन्दर कविता....बसंत ऋतु आ ही गयी....सुन्दर रचना के लिए बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  15. बहुत सुन्दर.....मन आनन्दित हो गया

    उत्तर देंहटाएं

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