"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

मंगलवार, 5 जनवरी 2010

“वो कुदरत की संरचना को कैसे प्यार करेगा?” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

जो बहती गंगा मे अपने हाथ नही धो पाया,
जीवनरूपी भवसागर को कैसे पार करेगा?
जो मानव-चोला धर कर इन्सान नही हो पाया,
वो कुदरत की संरचना को कैसे प्यार करेगा?
जो लेने का अभिलाषी है, देने में पामर है,
जननी-जन्मभूमि का. वो कैसे आभार करेगा?
वो कुदरत की संरचना को कैसे प्यार करेगा?
जो स्वदेश का खाता और परदेशों की गाता है,
वो संकटमोचन बनकर, कैसे उद्धार करेगा?
वो कुदरत की संरचना को कैसे प्यार करेगा?
जो खेतों और खलिहानों में, चिंगारी दिखलाता.
प्रेम-प्रीत के घर का वो, कैसे आधार धरेगा?
वो कुदरत की संरचना को कैसे प्यार करेगा?

15 टिप्‍पणियां:

  1. सही है, जिसे प्रकृति से प्यार नहीं, वह पशु है इंसान नहीं॥

    उत्तर देंहटाएं
  2. शास्त्री जी एक सशक्त रचना..सुंदर भावों की प्रवाह करती एक बेहतरीन कविता..धन्यवाद!!

    उत्तर देंहटाएं
  3. शास्त्री जी बहुत सुंदर रचना.
    धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  4. जो स्वदेश का खाता और परदेशों की गाता है,
    वो संकटमोचन बनकर, कैसे उद्धार करेगा?
    बहुत सुन्दर.

    उत्तर देंहटाएं
  5. सुंदर भाव के साथ ....सुंदर रचना.....

    उत्तर देंहटाएं
  6. बिलकुल सही कहा आपने
    जो स्वदेश का खाता और परदेशों की गाता है,
    वो संकटमोचन बनकर, कैसे उद्धार करेगा?
    वो कुदरत की संरचना को कैसे प्यार करेगा?

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत उम्दा रचना!!

    ’सकारात्मक सोच के साथ हिन्दी एवं हिन्दी चिट्ठाकारी के प्रचार एवं प्रसार में योगदान दें.’

    -त्रुटियों की तरफ ध्यान दिलाना जरुरी है किन्तु प्रोत्साहन उससे भी अधिक जरुरी है.

    नोबल पुरुस्कार विजेता एन्टोने फ्रान्स का कहना था कि '९०% सीख प्रोत्साहान देता है.'

    कृपया सह-चिट्ठाकारों को प्रोत्साहित करने में न हिचकिचायें.

    -सादर,
    समीर लाल ’समीर’

    उत्तर देंहटाएं
  8. शास्त्री जी बहुत सुंदर रचना.
    धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  9. जो स्वदेश का खाता और परदेशों की गाता है,
    वो संकटमोचन बनकर, कैसे उद्धार करेगा?
    वो कुदरत की संरचना को कैसे प्यार करेगा
    Bahut khoob, aajkal inhee kee chal rahee hai !

    उत्तर देंहटाएं
  10. waah waah shastri ji ..............bahut hi sudar likha hai............prakriti se pyar karne wala hi mahaan hai.

    उत्तर देंहटाएं
  11. जो मानव-चोला धर कर इन्सान नही हो पाया,
    वो कुदरत की संरचना को कैसे प्यार करेगा?

    बहुत सही कहा शास्त्री जी।

    उत्तर देंहटाएं
  12. जो स्वदेश का खाता और परदेशों की गाता है,
    वो संकटमोचन बनकर, कैसे उद्धार करेगा?..

    सत्य वचन शास्त्री जी ......... उत्तम बात कही है आपने ...........

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails