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शनिवार, 16 जनवरी 2010

“मन सुमन की गन्ध को पहचानता है।” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

आइना छल और कपट को जानता है।
मन सुमन की गन्ध को पहचानता है।।

झूठ, मक्कारी, फरेबी फल रही,
भेड़ियों को भेड़ बूढ़ी छल रही,
जुल्म कब इंसानियत को मानता है।
मन सुमन की गन्ध को पहचानता है।।

पिस रहा खुद्दार है, सुख भोगता गद्दार है,
बदले हुए हालात में गुम हो गया किरदार है,
बाप पर बेटा दुनाली तानता है।
मन सुमन की गन्ध को पहचानता है।।

बेसुरा सुर साज से आने लगा,
पेड़ अपने फल स्वयं खाने लगा,
भाई से तकरार भाई ठानता है।
मन सुमन की गन्ध को पहचानता है।।

16 टिप्‍पणियां:

  1. waakai mein shastri ji,
    mann suman ki gandh ko pehchaanta hai...

    bahut he achi aur sachchi rachna....

    उत्तर देंहटाएं
  2. जुल्म कब इंसानियत को मानता है।
    मन सुमन की गन्ध को पहचानता है।।
    बहुत ख़ूबसूरत रचना लिखा है आपने! खासकर ये पंक्तियाँ बहुत अच्छी लगी!

    उत्तर देंहटाएं
  3. हर एक पंक्ति समाज के बीच से निकली हुई जो कड़वी है पर सच्चाई है..खूबसूरत कविता..बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  4. पिस रहा खुद्दार है, सुख भोगता गद्दार है,
    बदले हुए हालात में गुम हो गया किरदार है,
    बाप पर बेटा दुनाली तानता है।
    मन सुमन की गन्ध को पहचानता है।।
    आज का सच।

    उत्तर देंहटाएं
  5. आप की इस अच्छी कविता मै एक सचाई झलकती है

    उत्तर देंहटाएं
  6. पिस रहा खुद्दार है, सुख भोगता गद्दार है,
    बदले हुए हालात में गुम हो गया किरदार है,
    असली किरदारों का गुम होना और नकली किरदारों का ताण्डव वाकई दुखदायी है. विडम्बना है कि
    बेसुरा सुर साज से आने लगा,
    पेड़ अपने फल स्वयं खाने लगा,
    बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति, सारगर्भित रचना

    उत्तर देंहटाएं
  7. आज का मन सुमन के गंध को पहचान कर भी चुप है, लाचार है, मजबूर है एक मूक दर्शक है; सिर्फ एक आह ले सकता है और दबी सी आवाज मे कराह रहा है:-(

    उत्तर देंहटाएं
  8. मन अच्‍छे ब्‍लाग की गंध को पहचानता है। जीवन की वास्‍तविकता को उजागर करती कविता, बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  9. सुमन भी तुम्हें पहचानता है !

    उत्तर देंहटाएं
  10. वाह वाह शास्त्री जी , गीत भा गया
    आइना छल और कपट को जानता है।
    मन सुमन की गन्ध को पहचानता है।।
    सुमन और गंध का नाजुक ख्याल , क्या कहने

    सचमुच आदमी अपनी जड़ें खाने लगा

    उत्तर देंहटाएं
  11. बेसुरा सुर साज से आने लगा,
    पेड़ अपने फल स्वयं खाने लगा,
    भाई से तकरार भाई ठानता है।
    मन सुमन की गन्ध को पहचानता है।।

    Waah, अति सुन्दर !

    उत्तर देंहटाएं
  12. samaj ki kadvi sachchayi ko bayan karti aapki kavita behad prabhavshali hai.

    उत्तर देंहटाएं

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