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शनिवार, 3 जुलाई 2010

“.. ..कुछ-कुछ होता है!” (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

दिल में कुछ-कुछ होता है,
जब याद किसी की आती है।
मन सब सुध-बुध खोता है,
जब याद किसी की आती है।


गुलशन वीराना लगता है,
पागल परवाना लगता है,
भँवरा दीवाना लगता है,
दिल में कुछ-कुछ होता है,
जब याद किसी की आती है।


मधुबन डरा-डरा लगता है,
जीवन मरा-मरा लगता है,
चन्दा तपन भरा लगता है,
दिल में कुछ-कुछ होता है,
जब याद किसी की आती है। 


नदियाँ जमी-जमी लगती हैं,
दुनियाँ थमी-थमी लगती हैं,
अँखियाँ नमी-नमी लगती हैं,
दिल में कुछ-कुछ होता है,
जब याद किसी की आती है।


मन सब सुध-बुध खोता है,
जब याद किसी की आती है।।

23 टिप्‍पणियां:

  1. वाह एक अन्य सुंदर रचना के लिए आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत ही शानदार प्रेम कविता।
    मजा आ गया।

    उत्तर देंहटाएं
  3. मधुबन डरा-डरा लगता है,
    जीवन मरा-मरा लगता है,
    चन्दा तपन भरा लगता है,

    बहुत सुन्दर..प्रेम भाव से भरी रचना...

    उत्तर देंहटाएं
  4. प्रेम मे पगी हुई सुंदर रचना..

    उत्तर देंहटाएं
  5. इसको पढ़के भी कुछ कुछ हो रहा है ।

    उत्तर देंहटाएं
  6. अरे वाह ………आज तो प्रेम रस मे भीगी बहुत ही नाज़ुक कविता लिखी है……………प्रेम रस मे सराबोर कर दिया।

    उत्तर देंहटाएं
  7. प्रेम रस मै भीगी हुयी एक सुंदर रचना

    उत्तर देंहटाएं
  8. यादें, वह कल की बातें, उभरती हैं, मिटती हैं। सोचिए कि यदि तनहाईयां ना होतीं तो क्या होता इनका

    उत्तर देंहटाएं
  9. यादें कभी नहीं मिटतीं ..प्रेमभाव लिए सुन्दर रचना.

    उत्तर देंहटाएं
  10. बिल्कुल होता है... श्रीमन शास्त्री जी... ...

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    इसे ०४.0७.10 की चर्चा मंच (सुबह 06 बजे) में शामिल किया गया है।
    http://charchamanch.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  12. प्रेम की बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति! शास्त्री जी...
    आभार्!

    उत्तर देंहटाएं
  13. हर रूप सुहाना लगता है जब याद किसी की आती है ।

    उत्तर देंहटाएं
  14. कोई जवाब नही शास्त्री जी..कोई भी विधा हो कोई भी मौसम हो..हर विषय वस्तु पर नायाब रचना...बहुत खूब..सुंदर कविता के लिए साधुवाद..

    उत्तर देंहटाएं
  15. भाव भीनी रचना के लिए मेरी बहुत बहुत बधाई के साथ ,
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  16. आपने तो अपनों की याद करा दी ... सीधे दिल में उतरती है आपकी रचना शास्त्री जी ...

    उत्तर देंहटाएं

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