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बुधवार, 21 जुलाई 2010

“कुछ दोहे” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)


बेमौसम आँधी चलें, दुनिया है बेहाल ।
गीतों के दिन लद गये,गायब सुर और ताल ।।

नानक, सूर, कबीर के , छन्द हो गये दूर ।
कर्णभेद संगीत का , युग है अब भरपूर । । 

रामराज का स्वप्न अब, लगता है इतिहास ।
केवल इनके नाम का, राजनीति में वास । । 

पानी अमृत तुल्य है, पानी सुख का सार । 
जल जीवन को लीलता, जल जीवन आधार ।।

22 टिप्‍पणियां:

  1. शास्त्री जी समाज से जुड़े हुए बातों पर आधारित बेहतरीन दोहे...बधाई

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  2. रामराज का स्वप्न अब, लगता है इतिहास ।
    केवल इनके नाम का, राजनीति में वास ।

    बहुत ही अच्छी बात ये राजनीती करने वाले आज के भ्रष्ट नेता और शरद पवार जैसे मंत्री राम को भी खुले आम ठगते है तो गरीब जनता का खून तो पियेंगे ही ,अब तो फिर से राम अवतार की प्रतीक्षा है ....

    उत्तर देंहटाएं
  3. रामराज का स्वप्न अब, लगता है इतिहास ।
    केवल इनके नाम का, राजनीति में वास ।

    बहुत सुन्दर दोहे शास्त्री जी!

    उत्तर देंहटाएं
  4. सारे ही दोहे बेहतरीन।
    दोहे में ही मौज है, दोहा रस की खान
    शब्‍द-शब्‍द में सोच है, छंदों की है जान।

    उत्तर देंहटाएं
  5. अछन्दीय आँधी में आपके गीत शीतल मन्द बयार हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  6. आज के युग में छन्दबद्ध रचना का सृजन करने का आपका प्रयास सराहनीय है!

    सुन्दर दोहे!

    उत्तर देंहटाएं
  7. पानी अमृत तुल्य है, पानी सुख का सार ।
    जल जीवन को लीलता, जल जीवन आधार ।

    सारे दोहे कुछ ना कुछ विसंगतियों को कह रहे हैं...सुन्दर अभिव्यक्ति

    उत्तर देंहटाएं
  8. रामराज का स्वप्न अब, लगता है इतिहास ।
    केवल इनके नाम का, राजनीति में वास । ।
    ..saargarbhit dohon ke liye aabhar

    उत्तर देंहटाएं
  9. सभी दोहे एक से बढकर एक हैं………………बहुत सुन्दर ।

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  10. Badi...Achhi kavita likhi hai sir aapne . Padhkar bahut kuchh seekhne ko mila.

    उत्तर देंहटाएं
  11. युग है अब भरपूर,
    टीन-कनस्तर पीटते ये सुर-ताल से दूर।

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  12. बहुत सुन्दर दोहे शास्त्री जी!

    उत्तर देंहटाएं
  13. सभी दोहे एक से बढ़कर एक हैं, किसी की एक की तारीफ करना तो मुश्किल है, आभार ।

    उत्तर देंहटाएं

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