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रविवार, 18 जुलाई 2010

घिर-घिर कर आये हैं बादल!!

11-4नभ से बरसाते निर्मल जल!
घिर-घिर कर आये हैं बादल!!
IMG_1698कच्चे घर और पक्के आँगन,
भीग रहे हैं खेत, बाग, वन,
धरती का गीला है आँचल!
नभ से बरसाते निर्मल जल!
घिर-घिर कर आये हैं बादल!!

झड़ी लगाने सावन आया,
भरा सरोवर मन को भाया,
कमल खिले हैं कोमल-कोमल!
नभ से बरसाते निर्मल जल!
घिर-घिर कर आये हैं बादल!!

दूर देश और देहातों में,
मेंहदी महक रही हाथों में,
हरे-भरे है सारे जंगल!
नभ से बरसाते निर्मल जल!
घिर-घिर कर आये हैं बादल!!

21 टिप्‍पणियां:

  1. प्रकृति का मनोरम वर्णन ....

    उत्तर देंहटाएं
  2. बडा ही मनोरम चित्रण किया है………………मज़ा आ गया।

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत ही बढिया .. वर्षऋतु का सटीक वर्णन !!

    उत्तर देंहटाएं
  4. आज तो हमारे यहाँ भी आये थे बादल और बरस के भी गए है ! मजा आ गया आज तो, आभार इस सुन्दर रचना के लिए !

    उत्तर देंहटाएं
  5. बादल बरस गये हैं, रस आपने दे दिया।

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत सुंदर जी , हमारे यहां भी कल से बरसात हो रही है.

    उत्तर देंहटाएं
  7. प्रकृती के नजदीक ले जाती रचना |चित्र बहुत सुन्दर हैं बधाई |
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  8. आपके इलाके में तो पानी गिर रहा है
    लेकिन इधर छत्तीसगढ़ में बारिश ठीक नहीं हो रही
    रचना पढ़कर मन भींगने को कर रहा है

    उत्तर देंहटाएं
  9. Sir .. Aapki kavita bahut achhi lagi.
    saral sabdon ka prayog kiya hai..isliye aur bhi achhi lagi.

    उत्तर देंहटाएं
  10. हमारे यहाँ तो बादल लगता है रूठ गये हैं इस कविता को मैं प्रार्थना के रूप में पढ़ रहा हूँ ।

    उत्तर देंहटाएं
  11. प्रकृति का मनोरम वर्णन ,बहुत ही बढिया .

    उत्तर देंहटाएं
  12. हिंदी ब्लॉग लेखकों के लिए खुशखबरी -


    "हमारीवाणी.कॉम" का घूँघट उठ चूका है और इसके साथ ही अस्थाई feed cluster संकलक को बंद कर दिया गया है. हमारीवाणी.कॉम पर कुछ तकनीकी कार्य अभी भी चल रहे हैं, इसलिए अभी इसके पूरे फीचर्स उपलब्ध नहीं है, आशा है यह भी जल्द पूरे कर लिए जाएँगे.

    पिछले 10-12 दिनों से जिन लोगो की ID बनाई गई थी वह अपनी प्रोफाइल में लोगिन कर के संशोधन कर सकते हैं. कुछ प्रोफाइल के फोटो हमारीवाणी टीम ने अपलोड.......

    अधिक पढने के लिए चटका (click) लगाएं




    हमारीवाणी.कॉम

    उत्तर देंहटाएं
  13. आज तो यहाँ भी घिर आये बादल.
    नन्ही नन्ही बूंदे लाये बादल
    सुबह से शाम...
    शाम से रात ..
    सब को खूब
    नहलाए सावन.

    उत्तर देंहटाएं
  14. बहुत अच्छा....मेरा ब्लागः"काव्य कल्पना" at http://satyamshivam95.blogspot.com .........साथ ही मेरी कविता "हिन्दी साहित्य मंच" पर भी.......आप आये और मेरा मार्गदर्शन करे...धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं

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