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गुरुवार, 29 जुलाई 2010

“गांधी की सन्तान कहते हुए भी... ..” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

एक पादप साल का,
जिसका अस्तित्व नही मिटा पाई,
कभी भी,समय की आंधी ।
ऐसा था,
हमारा राष्ट्र-पिता,महात्मा गान्धी ।।
कितना है कमजोर,
सेमल के पेड़ सा-
आज का नेता ।
जो किसी को,कुछ नही देता ।।
दिया सलाई का-
मजबूत बक्सा,
सेंमल द्वारा निर्मित,एक भवन ।
माचिस दिखाओ,और कर लो हवन ।
आग ही तो लगानी है,
चाहे-तन, मन, धन हो या वतन।।
यह बहुत मोटा, ताजा है,
परन्तु,
सूखे साल रूपी,गांधी की तरह बलिष्ट नही,
इसे तो गांधी की सन्तान कहते हुए भी-
.........................।।

17 टिप्‍पणियां:

  1. कितना है कमजोर,
    सेमल के पेड़ सा-
    आज का नेता ।
    जो किसी को,कुछ नही देता ।।
    एक बेहतरीन व्यंग्य्……………गज़ब की चोट्।

    उत्तर देंहटाएं
  2. हमारा राष्ट्र-पिता,महात्मा गान्धी ।।
    कितना है कमजोर,
    सेमल के पेड़ सा-
    आज का नेता ।
    ....yatharthprak rachna..
    Karara vyang

    उत्तर देंहटाएं
  3. इसे तो गांधी की सन्तान कहते हुए भी-
    .........................।।

    badi sahi baat kahi.......bina likhe aapne...........:)

    उत्तर देंहटाएं
  4. दिया सलाई का-
    मजबूत बक्सा,
    सेंमल द्वारा निर्मित,एक भवन ।
    माचिस दिखाओ,और कर लो हवन ।
    आग ही तो लगानी है,
    चाहे-तन, मन, धन हो या वतन।।
    Bahut sundar, Shashtri ji

    उत्तर देंहटाएं
  5. आप की रचना 30 जुलाई, शुक्रवार के चर्चा मंच के लिए ली जा रही है, कृप्या नीचे दिए लिंक पर आ कर अपने सुझाव देकर हमें प्रोत्साहित करें.
    http://charchamanch.blogspot.com

    आभार

    अनामिका

    उत्तर देंहटाएं
  6. यह बहुत मोटा, ताजा है,
    परन्तु,
    सूखे साल रूपी,गांधी की तरह बलिष्ट नही,
    इसे तो गांधी की सन्तान कहते हुए भी- .......

    बहुत ही सटीक

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति....लाजवाब ...

    उत्तर देंहटाएं
  8. सही कह रहे है शास्त्री जी आज तो बहुत कुछ बदल चुका है...बढ़िया रचना बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  9. सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ लाजवाब रचना लिखा है आपने!

    उत्तर देंहटाएं
  10. आज के नेता पर सटीक टिप्‍पणी। रचना में व्‍यंग्‍य होते हुए भी गहराई है।

    उत्तर देंहटाएं

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