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sahi hai sir..mausam ke mijaj ne man khush kar diya...aur rachna bhi fuli nahi sma rahi :)
जवाब देंहटाएंबचपन याद आ गया…………………ऐसे ही बहुत झूला झूला है………………कोई लौटा दे मेरे बीते हुये दिन्।
जवाब देंहटाएंउमस भरी गर्मी में ठंडी ठंडी चीजें बहुत अच्छी लगती हैं।
जवाब देंहटाएंआपने तो ललचा दिया ! आभार !
जवाब देंहटाएंगर्मी का कुछ तो उपाय करना ही होगा.
जवाब देंहटाएंसुन्दर गीत
मुह मे पानी तो मेरे भी आ गया पर ये मौसम अब कुलफी नही खाने देगा...
जवाब देंहटाएंशास्त्री जी नमस्कार.... व्यस्त रहने की वजह से कमेन्ट नहीं कर पाने के लिए माफ़ी चाहता हूँ... प्रस्तुत रचना बहुत अच्छी लगी...
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www.lekhnee.blogspot.com
achey chitron ke saath mohak varnan guru ji mahaaraj...
जवाब देंहटाएंसुन्दर गीत |
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर गीत, ओर सुंदर सुंदर फ़ोटो जी. धन्यवाद
जवाब देंहटाएंaanand badha diya..................
जवाब देंहटाएंmaza kara diya monsoon ka
सरस, सुंदर!
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