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शुक्रवार, 2 जुलाई 2010

“पा जाऊँ यदि प्यार तुम्हारा!” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)



कंकड़ को भगवान मान लूँ,
पा जाऊँ यदि प्यार तुम्हारा!
काँटों को वरदान मान लूँ,
पा जाऊँ यदि प्यार तुम्हारा!


दुर्गम पथ बन जाये सरल सा,
अमृत घट बन जाए गरल का,
पीड़ा को मैं प्राण मान लूँ. 
पा जाऊँ यदि प्यार तुम्हारा!


बेगानों से प्रीत लगा लूँ,
अनजानों को मीत बना लूँ,
आशा को अनुदान मान लूँ,
पा जाऊँ यदि प्यार तुम्हारा!


रीते जग में  मन भरमाया,
जीते जी माया ही माया,
साधन को संधान मान लूँ,
पा जाऊँ यदि प्यार तुम्हारा!

17 टिप्‍पणियां:

  1. वाह प्यार से तो सब कुछ मिल जाता है ...बहुत सुन्दर.

    उत्तर देंहटाएं
  2. पीड़ा को मैं प्राण मान लूँ.
    पा जाऊँ यदि प्यार तुम्हारा!

    पीड़ा जब पीड़ा न लगे
    जागते जब स्वप्न जगे
    कुछ ऐसी बात हो कि
    खड़े रह जायें ठगे से
    बस समझो कि प्यार हो गया.

    उत्तर देंहटाएं
  3. दुर्गम पथ बन जाये सरल सा,
    अमृत घट बन जाए गरल का,
    पीड़ा को मैं प्राण मान लूँ.
    पा जाऊँ यदि प्यार तुम्हारा....बहुत सुन्दर.

    उत्तर देंहटाएं
  4. शास्त्री जी, बहुत सुंदर

    http://sanjaykuamr.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  5. सच प्यार मे कितनी ताकत होती है जीवन सरल हो जाता है्………………बहुत ही सुन्दर मनभावन कविता लिखी है।

    उत्तर देंहटाएं
  6. रीते जग में मन भरमाया,
    जीते जी माया ही माया,
    साधन को संधान मान लूँ,
    पा जाऊँ यदि प्यार तुम्हारा!
    सुंदर अभिव्यक्ति ,शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं
  7. prashansha ke liye shabda nahii hai...........likhte rahiye .........aur ham rasaaswaadan karte rahe.........

    उत्तर देंहटाएं
  8. कंकड़ को भगवान मान लूँ,
    पा जाऊँ यदि प्यार तुम्हारा!
    काँटों को वरदान मान लूँ,
    पा जाऊँ यदि प्यार तुम्हारा!

    बहुत सुंदर भाव है..सुंदर कविता

    उत्तर देंहटाएं
  9. प्यार से तो सब कुछ मिल जाता है ...बहुत सुन्दर.

    उत्तर देंहटाएं
  10. दुर्गम पथ बन जाये सरल सा,
    अमृत घट बन जाए गरल का,
    पीड़ा को मैं प्राण मान लूँ.
    पा जाऊँ यदि प्यार तुम्हारा!

    सुन्दर भावों से सजी अद्भुत रचना...

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत बढ़िया ..शास्त्री जी कविता बहुत भावपूर्ण और प्रभावी है..मुझे बहुत अच्छी लगी..सुंदर प्रस्तुतिकरण के लिए आभार

    उत्तर देंहटाएं
  12. वाह, सुन्‍दर ...
    साधन को संधान मान लूँ,
    पा जाऊँ यदि प्यार तुम्हारा!

    उत्तर देंहटाएं
  13. हमेशा की तरह बहुत प्यारी रचना ...

    उत्तर देंहटाएं

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