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सोमवार, 12 जुलाई 2010

“.. .. .बदल जायेगा!” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

मोम सा मत हृदय को बनाना कभी,
रूप हर पल में इसका बदल जायेगा!
शैल-शिखरों में पत्थर सा हो जायेगा,
घाटियाँ देखकर यह पिघल जायेगा!!


देगा हर एक कदम पर दगा आपको,
सह न पायेगा  यह शीत और ताप को,
पुण्य को देखकर यह दहल जायेगा,
पाप को देखते ही मचल जायेगा!
रूप पल भर में इसका बदल जायेगा!!


आइने की तरह से सजाना इसे, 
क्रूर-मग़रूर सा मत बनाना इसे,
दिल के दर्पण में इक बार तो झाँक लो,
झूठ और सत्य का भेद खुल जायेगा!
रूप पल भर में इसका बदल जायेगा!!


टूटना, कांच का खास दस्तूर है,
झुकना-मुड़ना नही इसको मंजूर है,
दिल को थाली का बैंगन बनाना नही,
वरना यह ढाल को देख ढल जायेगा!  
रूप पल भर में इसका बदल जायेगा!!

20 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही सुन्दर गीत लिखा है………………एक सार्थक संदेश देता हुआ।

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत गहरी बात कही है अपने भाईसाहब...बहुत सुंदर गीत...!

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत गहरी बात कही है अपने भाईसाहब...बहुत सुंदर गीत...!

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर और सार्थक गीत है आपका।
    बहुत-बहुत अच्छा लगा और शिक्षाप्रद भी। वाह!

    उत्तर देंहटाएं
  5. टूटना, कांच का खास दस्तूर है,
    झुकना-मुड़ना नही इसको मंजूर है,
    दिल को थाली का बैंगन बनाना नही,
    वरना यह ढाल को देख ढल जायेगा!
    रूप पल भर में इसका बदल जायेगा!

    संदेशप्रद रचनाएं अच्‍छी लगती हें !!

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत सुन्दर गीत...सन्देश देता हुआ....

    उत्तर देंहटाएं
  7. टूटना, कांच का खास दस्तूर है,
    झुकना-मुड़ना नही इसको मंजूर है,
    आपकी रचनाएँ अलग सा एहसास दे जाती हैं

    उत्तर देंहटाएं
  8. मंगलवार 13 जुलाई को आपकी रचना ... चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर ली गयी है आभार

    http://charchamanch.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  9. कोई शक नहीं कि आप उच्च श्रेणी का साहित्य सृजन कर रहे हैं..

    उत्तर देंहटाएं
  10. बेहद उम्दा पोस्ट के लिए बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनाएं!

    आपकी चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है यहां भी आएं

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत ही सुन्‍दर शब्‍द रचना ।

    उत्तर देंहटाएं
  12. टूटना, कांच का खास दस्तूर है,
    झुकना-मुड़ना नही इसको मंजूर है,

    wahhhhhhhhhh kya baat hai aapne to gagar m sagar bhar diya

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  13. बहुत अच्छी लगी तुलना
    "दिल को थाली का बैगन-------"
    आशा

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  14. Shri maan ji .. pahli baar aapke blog par aaya. Itni sunder rachna padhkar dil khush ho gaya.

    I wish you all he best sir g.

    उत्तर देंहटाएं

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