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गुरुवार, 22 जुलाई 2010

“मेरी पसन्द का गीत सुनिए” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

आज सुनिए मेरी पसन्द का यह गीत!
इसको स्वर भर कर गाया है -
सुश्री मिथिलेश आर्या ने!
(यह गीत मेरा लिखा हुआ नहीं है।)
गीत के बोल हैं-
"जीवन खतम हुआ तो जीने का ढंग आया….

जीवन खतम हुआ तो जीने का ढंग आया,
जब शम्मा बुझ गयी तो महफिल में रंग आया । 
मन की मशीनरी ने जब ठीक चलना सीखा,
तब बूढ़े तन के हर एक पुर्जे में जंग आया ।           
जब शम्मा बुझ गयी तो महफिल में रंग आया ।।
गाड़ी निकल गयी तो घर से चला मुसाफिर,
मायूस हाथ खाली बैरंग लौट आया ।
जब शम्मा बुझ गयी तो महफिल में रंग आया ।।
फुरसत के वक्त में मेरे सिमरण का वक्त निकला,
उस वक्त वक्त माँगा जब वक्त तंग आया ।
जब शम्मा बुझ गयी तो महफिल में रंग आया । 
आयु ने जब सभी कुछ हथियार फेंक डाले,
यमराज फौज लेकर करने को जंग आया ।           
जब शम्मा बुझ गयी तो महफिल में रंग आया ।।

18 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बढ़िया है. शास्त्री साहब आप उस रचना सहित किसी भी रचना, चित्र इत्यादि का कभी भी प्रयोग कर सकते हैं. आभारी रहूंगा.

    उत्तर देंहटाएं
  2. ज़िन्दगी की हकीकत है ये और स्वर भी कमाल का है……………सुनवाने के लिए आभार्।

    उत्तर देंहटाएं
  3. जीवन का सार समा गया है इसमें। शुक्रिया इस शानदार गीत के लिए।
    ………….
    अथातो सर्प जिज्ञासा।
    संसार की सबसे सुंदर आँखें।

    उत्तर देंहटाएं
  4. जीवन दर्शन के अनेकों रंगों
    को पर्भाषित करता हुआ
    सुन्दर गीत ....
    वाह !!

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुंदर गीत जी आवज भी बहुत ही सुंदर यही है जीवन का सार भी. धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  6. आप की रचना 23 जुलाई, शुक्रवार के चर्चा मंच के लिए ली जा रही है, कृप्या नीचे दिए लिंक पर आ कर अपने सुझाव देकर हमें प्रोत्साहित करें.
    http://charchamanch.blogspot.com

    आभार

    अनामिका

    उत्तर देंहटाएं
  7. हिन्दी और उर्दू के शब्दों के मिश्रण से बहुत सुन्दर ध्वनि उत्पन्न हुई है इस गीत मे ।

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत सुन्दर गीत प्रेरणा देता हुआ

    उत्तर देंहटाएं
  9. badi aatmeeyta se kahte hai.aisa lagta hai kuchh khokar kamaye hain ye bhaav.

    उत्तर देंहटाएं

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