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मंगलवार, 20 जुलाई 2010

"बाल कविता मेरी : स्वर-अर्चना चावजी का"

कल का लिखा हुआ
और आज का गाया हुआ 
यह मुक्तक-बाल गीत!
प्रस्तुत है-
इसको अपना मधुर स्वर  दिया है-
मानसून का मौसम आया,
तन से बहे पसीना!
भरी हुई है उमस हवा में,
जिसने सुख है छीना!!

कुल्फी बहुत सुहाती हमको,
भाती है ठण्डाई!
दूध गरम ना अच्छा लगता,
शीतल सुखद मलाई!!

पंखा झलकर हाथ थके जब,
हमने झूला झूला!
ठण्डी-ठण्डी हवा लगी तब,
मन खुशियों से फूला!!
(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

13 टिप्‍पणियां:

  1. सुमधुर स्वर के साथ बहुत ही सुन्दर गीत्।

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  2. roopchnd ji mosm ki ums kaa vrnan bhut khub andaaz men kiya he . akhtar khan akela kota rajsthan

    उत्तर देंहटाएं
  3. शब्द और सुर का यह संगम बहुत भाया

    उत्तर देंहटाएं

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