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रविवार, 4 जुलाई 2010

“पाँव वन्दना” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

पूजनीय पाँव हैं, धरा जिन्हें निहारती।
सराहनीय शूद्र हैं, पुकारती है भारती।।
 

चरण-कमल वो धन्य हैं, 
जो जिन्दगी को दें दिशा,
वे चाँद-तारे धन्य हैं,
हरें जो कालिमा निशा,
प्रसून ये महान हैं, प्रकृति है सँवारती।
सराहनीय शूद्र हैं, पुकारती है भारती।।
 

जो चल रहें हैं, रात-दिन,
वो चेतना के दूत है,
समाज जिनसे है टिका,
वे राष्ट्र के सपूत है,
विकास के ये दीप हैं, मही इन्हें दुलारती।
सराहनीय शूद्र हैं, पुकारती है भारती।।
 

जो राम का चरित लिखें,
वो राम के अनन्य हैं,
जो जानकी को शरण दें,
वो वाल्मीकि धन्य हैं,
ये वन्दनीय हैं सदा, उतारो इनकी आरती।
सराहनीय शूद्र हैं, पुकारती है भारती।।

32 टिप्‍पणियां:

  1. बिल्कुल सत्य है. पांव न हों तो शरीर अधूरा है. श्रीराम महान हैं, लेकिन ऋषि बाल्मीकि भी उतने ही महान हैं कि उन्होंने श्रीराम के जीवन चरित्र को दुनिया के सामने रखा..
    वास्तव में ब्राह्मण-शूद्र का भेद ही हिन्दुओं के लिये घोर कष्टदायक बनता जा रहा है. एक समतामूलक समाज की स्थापना आज हिन्दुओं और भारत के लिये सबसे बड़ी आवश्यकता है...

    उत्तर देंहटाएं
  2. जो चल रहें हैं, रात-दिन,
    वो चेतना के दूत है,
    समाज जिनसे है टिका,
    वे राष्ट्र के सपूत है,
    आनंद आ गया !

    उत्तर देंहटाएं
  3. जो चल रहें हैं, रात-दिन,
    वो चेतना के दूत है,
    समाज जिनसे है टिका,
    वे राष्ट्र के सपूत है,
    आनंद आ गया !
    बिलकुल सही कहा । बहुत अच्छी है रचना बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  4. अनुकरणीय प्रस्तुति....सुन्दर रचना..

    उत्तर देंहटाएं
  5. यह तो एक कवि का ही सम्मान हुआ ना ।

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत सुन्दर रचना...... बधाई.

    उत्तर देंहटाएं
  7. जो राम का चरित लिखें,
    वो राम के अनन्य हैं,
    जो जानकी को शरण दें,
    वो वाल्मीकि धन्य हैं,

    अनुपम रचना ... आशा का संचार करती है ...आपको प्रणाम ...

    उत्तर देंहटाएं
  8. वाह वाह्……………………।बहुत ही सुन्दर वन्दना।

    उत्तर देंहटाएं
  9. अह्सानों के समर्पित भाव,पांव वन्दन!!

    उत्तर देंहटाएं
  10. मंगलवार 06 जुलाई को आपकी रचना ... चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर ली गयी है आभार

    http://charchamanch.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  11. एक सही रचनाकार का कामकुरीतियों के जाल में जकड़े समाज में छटपटाने की भावना और उस जाल को तोड़ने की शक्ति जागृत करना है।
    यह काम आप ब-ख़ूबी कर रहे हैं।
    परमात्‍मा ने हमें खुशबूदार फूल बनाया है, क्‍या हम यह खुशबू सब तक फैला रहे हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत अच्छा लिखा है शाश्त्री जी

    उत्तर देंहटाएं
  13. आदरणीय शास्त्री जी को प्रणाम! सराहनीय शूद्र हैं, पुकारती है भारती।। अच्छी कविता। ईश्वर की सच्चे मन से अराधना, वर्ण भेद गौण हो जाता है, 'सुवा पढ़ावत गणिका तारी' और निषाद की भक्ति इसका प्रमाण है।

    उत्तर देंहटाएं
  14. बेहतरीन रचना और सराहनीय भावनाएं ! मैं आपसे सहमत हूँ !

    उत्तर देंहटाएं
  15. जो जानकी को शरण दें,
    वो वाल्मीकि धन्य हैं,
    इस अप्रतिम रचना के लिए बधाई स्वीकार करें...
    नीरज

    उत्तर देंहटाएं
  16. शिल्पगतरूप से सुगठित एवं भावसंपन्न गीत के लिए बधाई स्वीकारें।
    स्वर्गीय मोतीराम शास्त्री ’शूद्र’ शब्द का तत्सम रूप ’शुद्ध’ बताया करते थे। आपकी रचना में ’शूद्र’ महिमा के प्रतिपादन से उनके कथन की पुष्टि हो गई।
    सद्भावी -डॉ० डंडा लखनवी

    उत्तर देंहटाएं
  17. शिल्पगतरूप से सुगठित एवं भावसंपन्न गीत के लिए बधाई स्वीकारें।
    स्वर्गीय मोतीराम शास्त्री ’शूद्र’ शब्द का तत्सम रूप ’शुद्ध’ बताया करते थे। आपकी रचना में ’शूद्र’ महिमा के प्रतिपादन से उनके कथन की पुष्टि हो गई।
    सद्भावी -डॉ० डंडा लखनवी

    उत्तर देंहटाएं
  18. शिल्पगतरूप से सुगठित एवं भावसंपन्न गीत के लिए बधाई स्वीकारें।
    स्वर्गीय मोतीराम शास्त्री ’शूद्र’ शब्द का तत्सम रूप ’शुद्ध’ बताया करते थे। आपकी रचना में ’शूद्र’ महिमा के प्रतिपादन से उनके कथन की पुष्टि हो गई।
    सद्भावी -डॉ० डंडा लखनवी

    उत्तर देंहटाएं
  19. शिल्पगतरूप से सुगठित एवं भावसंपन्न गीत के लिए बधाई स्वीकारें।
    स्वर्गीय मोतीराम शास्त्री ’शूद्र’ शब्द का तत्सम रूप ’शुद्ध’ बताया करते थे। आपकी रचना में ’शूद्र’ महिमा के प्रतिपादन से उनके कथन की पुष्टि हो गई।
    सद्भावी -डॉ० डंडा लखनवी

    उत्तर देंहटाएं
  20. बहुत भाव भीनी रचना |बधाई
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  21. अच्छे विचार....... बहुत खूब!

    उत्तर देंहटाएं
  22. उपयोगी और जरूरी कविता प्रकाशित करने के लिए आभार.

    उत्तर देंहटाएं

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