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रविवार, 25 जुलाई 2010

“यही समाजवाद है…” (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

समाजवाद से-
कौन है अंजाना?
लोगों ने भी यह जाना।
समाजवाद आ गया है,
क्या यह प्रयोग नया है?
डाका, राहजनी, और चोरी,
सुरसा के मुँह के समान-
बढ़ रही है,रिश्वतखोरी।
देख रहे हैं-
गरीब और मजदूर,
होता जा रहा है,
चिकित्सा और न्याय-
उनसे दूर।
बढ़ता जा रहा है-
भ्रष्टाचार, व्यभिचार और शोषण,
नेतागण कर रहे हैं-
अपना और अपने परिवार का पोषण।
क्या समाजवाद-
सबके हित की-आवाज है?
क्या देश में दीन-दुखी,
आम आदमी का राज है?
पछता रहे हैं,
गरीब और कमजोर,
क्यों भेजा था उन्होंने संसद में-
एक निकम्मा और चोर?
आज केवल-
नेता ही आबाद है,
जनता आज भी बरबाद है।
क्या यही समाजवाद है?
यही लोकतंत्र है,
हाँ यही समाजवाद है।

18 टिप्‍पणियां:

  1. आज केवल-
    नेता ही आबाद है,
    जनता आज भी बरबाद है।

    जनता कब आबाद हुई है.
    बेहतरीन रचना

    उत्तर देंहटाएं
  2. सारे वाद कभी के मृत्यु को प्राप्त है,जनता उनकी लाशें ढो रही है, ये भुखे गीद्द उसको उन लाशों को नोच नोच पेट भर रहे है।

    उत्तर देंहटाएं
  3. जय हो, बड़े ढंग से धोयी हैं समाजवाद की कुरीतियाँ।

    उत्तर देंहटाएं
  4. आज केवल-
    नेता ही आबाद है,
    जनता आज भी बरबाद है।
    जी आज का यही समाजवाद है......
    धन्यवाद इस सच्चाई से रुबरु करवाने के लिये

    उत्तर देंहटाएं
  5. भारत के नेताओं के लिये तो यही समाजवाद है..

    उत्तर देंहटाएं
  6. नेता ही आबाद है,
    जनता आज भी बरबाद है
    सही बात , कहने का ढंग अलग समाजवाद की नई परिभाषा आपने बताई ,बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  7. लाजवाब रचना……………सत्य दिखलाती हुयी।
    कल (26/7/2010) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट देखियेगा।
    http://charchamanch.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  8. य्स समाजवाद बस इन नेताओं के लिए ही है ... वैसे हर तरह का वाद नेताओं और अमीरों के लिए है ...

    उत्तर देंहटाएं
  9. हमारीवाणी का लोगो अपने ब्लाग पर लगाकर अपनी पोस्ट हमारीवाणी पर तुरंत प्रदर्शित करें

    हमारीवाणी एक निश्चित समय के अंतराल पर ब्लाग की फीड के द्वारा पुरानी पोस्ट का नवीनीकरण तथा नई पोस्ट प्रदर्शित करता रहता है. परन्तु इस प्रक्रिया में कुछ समय लग सकता है. हमारीवाणी में आपका ब्लाग शामिल है तो आप स्वयं हमारीवाणी पर अपनी ब्लागपोस्ट तुरन्त प्रदर्शित कर सकते हैं.

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  10. जी.... यही है समाजवाद... बहुत अच्छी रचना...

    उत्तर देंहटाएं
  11. Guru ji...

    SAB TV par MONDAY-THURSDAY 10 PM ek haasya serial aata hai, "LaapataGanj-Sharad Joshi ki Kahaniyon Ka Pata", abhi kuch hee din pehle SAMAJVAAD pe unhone kuch pradarshit kiya tha, aapka lekh padhne ke baad samajh aaya ki kitna sach tha.

    उत्तर देंहटाएं
  12. आज के परिपेक्ष में लिखी सुन्दर रचना ..

    उत्तर देंहटाएं
  13. सही बात है, क्यों नहीं बुराइयों की भी एकरसता ! सही लिखा है आपने. आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  14. कुछ लोगों का समाजवाद यही है ...!

    उत्तर देंहटाएं

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