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मंगलवार, 13 जुलाई 2010

“मेरी पसन्द का गीत सुनिए” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

मित्रों!
आज कुछ लिखने का मन नहीं था!
केवल सुनने का मन था!
आप भी सुनिए मेरी पसन्द का यह गीत!
इसको स्वर भर कर गाया है -
श्री योगेश दत्त आर्य ने!
(यह गीत मेरा लिखा हुआ नहीं है।)
गीत के बोल हैं-
"सारी सृष्टि दुल्हिन सी सजी है….”

11 टिप्‍पणियां:

  1. इतना सुन्दर स्वर है
    दिल तक इसका असर है

    उत्तर देंहटाएं
  2. योगेश जी की आवाज का कमाल देखा। बहुत सुन्दर पोस्ट बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  3. जरूरी नहीं है कि रोज-रोज लिखा ही जाए
    कभी-कभी दूसरों को सुनना भी अच्छा लगता है.
    आपने शानदार स्वर के मालिक से परिचय करवाया उसके लिए धन्यवाद.

    उत्तर देंहटाएं

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