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शनिवार, 10 जुलाई 2010

"मोम बन कर पिघल जायेंगे!!" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

आप इक बार ठोकर से छू लो हमें,
हम कमल हैं चरण-रज से खिल जायेगें!
प्यार की ऊर्मियाँ तो दिखाओ जरा,
संग-ए-दिल मोम बन कर पिघल जायेंगे!!

फूल और शूल दोनों करें जब नमन,
खूब महकेगा तब जिन्दगी का चमन,
आप इक बार दोगे निमन्त्रण अगर,
दीप खुशियों के जीवन में जल जायेंगे!

प्यार की ऊर्मियाँ तो दिखाओ जरा,
संग-ए-दिल मोम बन कर पिघल जायेंगे!!

हमने पारस सा समझा सदा आपको,
हिम सा शीतल ही माना है सन्ताप को,
आप नज़रें उठाकर तो देखो जरा,
सारे अनुबन्ध साँचों में ढल जायेंगे!

प्यार की ऊर्मियाँ तो दिखाओ जरा,
संग-ए-दिल मोम बन कर पिघल जायेंगे!!

झूठा ख़त ही हमें भेज देना कभी,
आजमा कर हमें देख लेना कभी,
साज-संगीत को छेड़ देना जरा,
हम तरन्नुम में भरकर ग़ज़ल गायेंगे!

प्यार की ऊर्मियाँ तो दिखाओ जरा,
संग-ए-दिल मोम बन कर पिघल जायेंगे!!

13 टिप्‍पणियां:

  1. मोम मना ही इतनी कोमल रचना को आकृति दे सकता है ।

    उत्तर देंहटाएं
  2. शास्त्रीजी , शास्त्रीजी !
    जय हो शास्त्रीजी !
    छा गए शास्त्रीजी ।

    सच कहूं तो , मैं उस ब्लॉगर को लगातार तीन तीन चार चार बार कमेंट करने नहीं जाता , जो मेरे यहां इस बीच एक बार भी अपनी प्रतिक्रिया न दे गया हो ।

    आपकी रचनाओं ने विवश किया है ।

    सही अर्थ में चिरयौवन से भरपूर रचना है आपकी !

    प्यार की उर्मियाँ तो दिखाओ जरा, संग-ए-दिल मोम बन कर पिघल जायेंगे!

    आप इक बार दोगे निमन्त्रण अगर, दीप खुशियों के जीवन में जल जायेंगे!

    झूठा ख़त ही हमें भेज देना कभी, आजमा कर हमें देख लेना कभी

    होश उड़ा देने वाली रचना के लिए आभार ! बधाई !

    - राजेन्द्र स्वर्णकार
    शस्वरं

    उत्तर देंहटाएं
  3. प्यार की ऊर्मियाँ तो दिखाओ जरा,
    संग-ए-दिल मोम बन कर पिघल जायेंगे!!
    क्या खूबसूरत भाव हैं
    बहुत सुन्दर

    उत्तर देंहटाएं
  4. झूठा ख़त ही हमें भेज देना कभी,
    आजमा कर हमें देख लेना कभी,
    साज-संगीत को छेड़ देना जरा,
    हम तरन्नुम में भरकर ग़ज़ल गायेंगे!

    बडी ही रंगीन रचना लिखी है आज तो………………अति सुन्दर्।

    उत्तर देंहटाएं
  5. सच्चा प्यार तो मोम बना ही देता है

    उत्तर देंहटाएं
  6. मां सरस्वती की कृपा आप पर सदा बनी रहे
    बहुत ही शानदार लिखा है आज भी आपने.

    उत्तर देंहटाएं
  7. झूठा ख़त ही हमें भेज देना कभी,
    आजमा कर हमें देख लेना कभी,
    साज-संगीत को छेड़ देना जरा,
    हम तरन्नुम में भरकर ग़ज़ल गायेंगे!

    बहुत सुन्दर ..

    उत्तर देंहटाएं

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