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शनिवार, 17 जुलाई 2010

“जामाता यानि दामाद” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

पाहुन का है अर्थ घुमक्कड़,
यम का दूत कहाता है।

सास-ससुर की छाती पर,
बैठा रहता जामाता है।।

खाता भी, गुर्राता भी है,
सुनता नही सुनाता है।

बेटी को दुख देता है तो,
सीना फटता जाता है।।

चंचल अविरल घूम रहा है ,
ठहर नही ये पाता है।

धूर्त भले हो किन्तु मुझे,
दामाद बहुत ही भाता है।।

15 टिप्‍पणियां:

  1. मै भी किसी का दामाद हूं ,क्या कहूं ।

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  2. बेहद उम्दा ............बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनाएं !

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत अच्छी लगी आप की यह रचना

    उत्तर देंहटाएं
  4. आपका यूँ स्पष्ट कहना, बड़ा सुहाता है।

    उत्तर देंहटाएं
  5. दामाद को दसवाँ ग्रह इसीलिये कहा गया है क्युँकि और ग्रहों की चाल तो ज्योतिष बता भी दे मगर दामाद रूपी ग्रह की चाल बताना मुश्किल होता है…………कब तोला हो और कब माशा पता ही नही चलता।

    उत्तर देंहटाएं
  6. अच्छी लगी बहुत बहुत बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  7. Sir ji .....................

    Hamare yahna to jamaai, yaani ki Daamaad ki hi izzat hoti hai, Ghar jamaai ki kuchh din tak hi, lekin baad men nahin.

    SAAS GHAR JAMAAI....
    AUR BAHAN GHAR BHAAI..
    GAR LUMBE SAMAY TAK TIKEN,
    TAB DONO HI GHADHE HAIN BHAAI.

    Kuchh is trah ki maanayta hai.

    Vaise aapki daamad par YE CHUTKI achhi lagi.

    ISKE LIYE AAPKO DHANAYBAAD.

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  8. :) :) बढ़िया है...पर आप भी तो किसी के दामाद होंगे ना ...

    उत्तर देंहटाएं
  9. यह तो बहुत पुरानी बात है लेकिन आपने नए अंदाज में कहा है !

    वैसे , यह भी तो हो सकता है :
    जामाता =जा+मत+आ

    उत्तर देंहटाएं
  10. लेकिन आज तो हर कोई दामाद बन्ने की कोशिश में रहता है.

    बहुत अच्छा लिखा.

    उत्तर देंहटाएं

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