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गुरुवार, 15 जुलाई 2010

“.. .. .चाँद बने बैठे चेले हैं!” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

सुख के बादल कभी न बरसे,
दुख-सन्ताप बहुत झेले हैं!
जीवन की आपाधापी में,
झंझावात बहुत फैले हैं!!

अनजाने से अपने लगते,
बेगाने से सपने लगते,
मँहगाई की मार पड़ी तो,
सबने ही पापड़ बेले हैं!
जीवन की आपाधापी में,
झंझावात बहुत फैले हैं!!

बन्धक आजादी खादी में,
संसद शामिल बर्बादी में,
बलिदानों की बलिवेदी पर,
लगते कहीं नही मेले हैं!
जीवन की आपाधापी में,
झंझावात बहुत फैले हैं!!

ज्ञानी है मूरख से हारा,
दूषित है गंगा की धारा,
टिम-टिम करते गुरू गगन में,
चाँद बने बैठे चेले हैं!
जीवन की आपाधापी में,
झंझावात बहुत फैले हैं!!

11 टिप्‍पणियां:

  1. ज्ञानी है मूरख से हारा,
    दूषित है गंगा की धारा,
    टिम-टिम करते गुरू गगन में,
    चाँद बने बैठे चेले हैं!
    जीवन की आपाधापी में,
    झंझावात बहुत फैले हैं!!
    वाह अद्भुत सुन्दर गीत। बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  2. Sir ji kya kahun... Samgh nahi aa raha. Padhkar mazaa aa gaya.
    Sabdon se khelna aapke liye bada aasaan hai.

    उत्तर देंहटाएं
  3. कविता के बहाने आपने प्रत्येक व्यक्ति की जिंदगी की तस्वीर खींच दी है। बधाई स्वीकारें।
    --------
    पॉल बाबा की जादुई शक्ति के राज़।
    सावधान, आपकी प्रोफाइल आपके कमेंट्स खा रही है।

    उत्तर देंहटाएं
  4. ज्ञानी है मूरख से हारा,
    दूषित है गंगा की धारा,
    टिम-टिम करते गुरू गगन में,
    चाँद बने बैठे चेले हैं

    बहुत सटीक व्यंग करते हुए एक सुन्दर गीत...

    उत्तर देंहटाएं
  5. ज्ञानी है मूरख से हारा,
    दूषित है गंगा की धारा,
    आज का यही सच है जी, बहुत सुंदर लगी आप की यह सची कविता

    उत्तर देंहटाएं
  6. टिम-टिम करते गुरू गगन में,चाँद बने बैठे चेले हैं! जीवन की आपाधापी में, झंझावात बहुत फैले हैं
    गज़ब का लिखा है…………………ज़िन्दगी कब फ़ुर्सत देती है इससे तो पल चुराने पडते हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  7. ज्ञानी है मूरख से हारा,
    दूषित है गंगा की धारा,
    टिम-टिम करते गुरू गगन में,
    चाँद बने बैठे चेले हैं!
    क्या बात है ...!

    उत्तर देंहटाएं

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