"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

सोमवार, 2 अगस्त 2010

“कैसी है यह लाचारी?” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

पढ़े-लिखों पर खादी भारी!
कैसी है यह लाचारी?
छिपी हुई खाकी वर्दी में,
दुनियाभर की मक्कारी!

बदल गये हैं मानक सारे,
बदल गईं हैं परिभाषा,
गांधी को मुँह चिढ़ा रही है,
खुद उनकी ही अभिलाषा,
गोरे चले गए भारत से,
कालों की दहशत जारी!

पढ़े-लिखों पर खादी भारी!
कैसी है यह लाचारी?
छिपी हुई खाकी वर्दी में,

दुनियाभर की मक्कारी!

मेजबान जिनको होना था,
वो सारे मेहमान हो गये,
सत्ता की भागीदारी में,
शामिल सब शैतान हो गये,
सहमें-सहमें से हैं साधू,
चोरों की नम्बरदारी!

पढ़े-लिखों पर खादी भारी!
कैसी है यह लाचारी?
छिपी हुई खाकी वर्दी में,

दुनियाभर की मक्कारी!

बसी विदेशों में जा कर के,
सोन-चिड़ैय्या भागी घर से,
स्विटजर में यह छिपी पड़ी है,
चील और कौओं के डर से,
इसीलिए तो निर्धनता की,
फैल रही है बीमारी!

पढ़े-लिखों पर खादी भारी!
कैसी है यह लाचारी?
छिपी हुई खाकी वर्दी में,

दुनियाभर की मक्कारी!

18 टिप्‍पणियां:

  1. पढ़े-लिखों पर खादी भारी!
    कैसी है यह लाचारी
    "कहाँ कहाँ नहीं है लाचारी.......बेहद प्रभावशाली अभिव्यक्ति.."

    regards

    उत्तर देंहटाएं
  2. पढ़े-लिखों पर खादी भारी!
    कैसी है यह लाचारी?
    छिपी हुई खाकी वर्दी में,
    दुनियाभर की मक्कारी!
    बहुत ही सुन्दरता से आपने सच्चाई को प्रस्तुत किया है! बेहद प्रभावशाली रचना!
    मित्रता दिवस की हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनायें!

    उत्तर देंहटाएं
  3. छिपी हुई खाकी वर्दी में,

    दुनियाभर की मक्कारी!
    बहुत सुंदर शास्त्री जी एक एक शव्द आज का सच बोल रहा है, आप की कलम को नमन. धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  4. बदल गये हैं मानक सारे,
    बदल गईं हैं परिभाषा,
    गांधी को मुँह चिढ़ा रही है,
    खुद उनकी ही अभिलाषा
    ...bade dukh aur afsos kee baat hai ki ab to hamare pujya Rashpita Gandhi ji ka prachalan sabse adhik ho raha hai lekin kahan? yah baat lagbhag sabi jaanne aur pahchanane lage hai ..
    Sarthak prasuti ke liya abhar

    उत्तर देंहटाएं
  5. गोरे चले गए भारत से,
    कालों की दहशत जारी!

    बहुत सुंदर शास्त्री जी !

    उत्तर देंहटाएं
  6. पढ़े-लिखों पर खादी भारी!
    कैसी है यह लाचारी
    prabhavshali abhivyakti.

    उत्तर देंहटाएं
  7. परिष्कृत भाषा में लिखी गई सोचने पर बाध्य करती कविता |बहुत बहुत बधाई |मित्रता दिवस के लिए आपको भी शुभ कामनायें|
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  8. बदल गये हैं मानक सारे,
    बदल गईं हैं परिभाषा,
    गांधी को मुँह चिढ़ा रही है,
    खुद उनकी ही अभिलाषा,
    गोरे चले गए भारत से,
    कालों की दहशत जारी!

    बिल्कुल सही बयान कर दिया हालात का और लाचारी का…………………आपकी लेखनी को नमन्।

    उत्तर देंहटाएं
  9. लाचारी की बहुत बढ़िया व्याख्या की है ...प्रभावशाली

    उत्तर देंहटाएं
  10. मंगलवार 3 अगस्त को आपकी रचना ... चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर ली गयी है .कृपया वहाँ आ कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ .... आभार

    http://charchamanch.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  11. Shastri ji first time i am reading your kavita.very very impressive....bahut sunder rachna.samaj ko aayana dikhati hui.I am following your blog.

    उत्तर देंहटाएं
  12. पढ़े-लिखों पर खादी भारी!
    कैसी है यह लाचारी

    waah..!
    kya likha hai aapne ..sahi aaiina dikha gayi aapki kavita
    bahut khoob..!

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails