जो हैं कोमल-सरल उनको मेरा नमन। जो घमण्डी हैं उनका ही होता पतन।। पेड़ अभिमान में थे अकड़ कर खड़े, एक झोंके में वो धम्म से गिर पड़े, लोच वालो का होता नही है दमन। जो घमण्डी हैं उनका ही होता पतन।। सख्त चट्टान पल में दरकने लगी, जल की धारा के संग में लुढ़कने लगी, छोड़ देना पड़ा कंकड़ों को वतन। जो घमण्डी हैं उनका ही होता पतन।। घास कोमल है लहरा रही शान से, सबको देती सलामी बड़े मान से, आँधी तूफान में भी सलामत है तन। जो घमण्डी हैं उनका ही होता पतन।। (चित्र गूगल सर्च से साभार) |
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बिल्कुल सच बात है।
जवाब देंहटाएंवाह जी वाह एकदम सच्ची बात .
जवाब देंहटाएंसच्चे और सरल लोग हर जगह पसंद किए जाते है..शास्त्री जी बहुत सुंदर कविता..बधाई
जवाब देंहटाएंसच बात !
जवाब देंहटाएंअच्छी और सच्ची कविता ...!
जवाब देंहटाएंएक बेहद उम्दा पोस्ट के लिए आपको बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनाएं !
जवाब देंहटाएंआपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है यहां भी आएं !
बहुत अच्छी प्रस्तुति।
जवाब देंहटाएंबिल्कुल सच कहा आपने.
जवाब देंहटाएंरामराम.
बिल्कुल सच कहा आपने.
जवाब देंहटाएंरामराम.
बहुत ही सुन्दर, शानदार और लाजवाब रचना लिखा है आपने जो काबिले तारीफ़ है! उम्दा प्रस्तुती!
जवाब देंहटाएंकोमल और सरल लोग ही सबको अच्छे लगते हैं |आपने बहुत सही कहा है |सुंदर रचना के लिए बहुत बहुत बधाई
जवाब देंहटाएंआशा
पेड़ अभिमान में थे अकड़ कर खड़े,
जवाब देंहटाएंएक झोंके में वो धम्म से गिर पड़े,
लोच वालो का होता नही है दमन।
बिलकुल सत्य.... शिक्षाप्रद रचनाँ !
आदरणीय,
ब्लॉग खोलने में अब आपको कोई अड़चन नहीं आएगी .....मैंने क्रोम में भी चेक कर लिया है .....सूचना के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !
लोच वालो का होता नही है दमन।
जवाब देंहटाएंबहुत ही सुन्दर बात कही आपने, हमेशा की तरह प्रेरणात्मक प्रस्तुति ।
सत्य वचन शास्त्री जी, बहुत सुंदर, आप की कविता पढ कर हम भी आईने मै देख कर अपनी गलतिया सुधार लेते है
जवाब देंहटाएंसरल भाषा मे एक दम सच्ची बात कह दी…………बहुत सुन्दर कविता।
जवाब देंहटाएंलोच वालो का होता नही है दमन।
जवाब देंहटाएं- सफलता के लिए स्वभाव में फ्लेक्सिबिलिटी आवाश्यक है - लेकिन एक सीमा तक.
बिल्कुल सही...मेरा भी नमन!
जवाब देंहटाएंएकदम सच्ची बात .................
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