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मंगलवार, 31 अगस्त 2010

“दो मुक्तक” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

जाल-जगत पर जाने कितने, उच्चारण होते होंगे।
रचनाओं में जाने कितने, शब्दों को ढोते होंगे।
लेख, कथा, नाटक से और कुछ काव्य-कुंज संधानों से,
चुन-चुनकर उन्नत बीजों को धरती पर बोते होंगे।

वन्दन और चन्दन  दोनों का जब तक होगा मेल नही।
बिन कोल्हू में पिसे तिलों से, कभी निकलता तेल नही।
तन भी महके, मन भी चहके ऐसा कोई विधान करो,
शब्द-साधना करना कोई चरवाहों का खेल नही।

17 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर लिखा है आपने! हर एक पंक्तियाँ सच्चाई बयान करती है!

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  2. डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक जी
    ख़ूब रंग जमाया आज भी !

    रचनाओं में जाने कितने, शब्दों को ढोते होंगे
    वाह शास्त्रीजी वाह !
    शब्द-साधना करना कोई चरवाहों का खेल नहीं
    जाल पर ही क्यों … मंच - मंच , अकादमियों , संस्थाओं , शहर - शहर बिना वंदन बिना चंदन वाले लिक्खाड़ आप - हम जैसों को पछाड़ें - पटकनियां देंने को प्रयासरत पाए जाते हैं ।

    लेकिन सरस्वती की कृपा ही हमारे अस्तित्व की रक्षा करती है ।

    जय हो …

    - राजेन्द्र स्वर्णकार

    उत्तर देंहटाएं
  3. वन्दन और चन्दन दोनों का जब तक होगा मेल नही।
    बिन कोल्हू में पिसे तिलों से, कभी निकलता तेल नही।
    तन भी महके, मन भी चहके ऐसा कोई विधान करो,
    शब्द-साधना करना कोई चरवाहों का खेल नही।

    पते की बात कही शास्त्री जी !

    उत्तर देंहटाएं
  4. दोनों ही मुक्तक यथार्थ का आभास कराते है| बहुत सुन्दर|

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर सत्य को सुभाशित करते मुक्तक। बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  6. शास्त्री जी,

    बस मात्र एक शब्द है:'सार्थक'

    उत्तर देंहटाएं
  7. लेख, कथा, नाटक से और कुछ काव्य-कुंज संधानों से,
    चुन-चुनकर उन्नत बीजों को धरती पर बोते होंगे

    बहुत सुन्दर भाव लिए हुए पंक्तियाँ

    दोनों मुक्तक बहुत अच्छे लगे ..

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत ही सुन्दर मुक्तक्………………भावो को उकेरते हुये।

    उत्तर देंहटाएं
  9. तन भी महके, मन भी चहके ऐसा कोई विधान करो,
    शब्द-साधना करना कोई चरवाहों का खेल नही।
    शास्त्री जी ....
    क्या खूब कहा है। गुप्त जी की पंक्तियां स्मरण हो आईं
    केवल मनोरंजन न कवि का कर्म होना चाहिए।
    उसमें उचित उपदेश का भी मर्म होना चाहिए।

    उत्तर देंहटाएं
  10. शब्द-साधना करना कोई चरवाहों का खेल नहीं सच्चाई बयान करती है! बहुत सुन्दर|

    उत्तर देंहटाएं
  11. हम तो चरवाहा बन बकरीनुमा शब्दों को ढूढ़ते रहते हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  12. दोनो मुकतक सचाई को व्यान करते है जी बहुत सुंदर, धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं

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