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रविवार, 22 अगस्त 2010

“… ..अच्छी नहीं लगती!” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

वफा और प्यार की बातें, किसे अच्छी नहीं लगतीं।
तपन के बाद बरसातें, किसे अच्छी नहीं लगतीं।
मिलन होता जहाँ बिछड़ी हुई, कुछ आत्माओं का, 
सुहानी चाँदनी रातें, किसे अच्छी नहीं लगतीं।।
---000---
गुलो-गुलशन की बरबादी, हमें अच्छी नहीं लगती।
वतन की बढ़ती आबादी, हमें अच्छी नहीं लगती।
जुल्म का सामना करने को, जिसको ढाल माना था-
सितम करती वही खादी, हमें अच्छी नहीं लगती।।
---000---

17 टिप्‍पणियां:

  1. "जुल्म का सामना करने को, जिसको ढाल माना था-
    सितम करती वही खादी, हमें अच्छी नहीं लगती।।"

    सत्य वचन महाराज !

    उत्तर देंहटाएं
  2. वफा और प्यार की बातें, किसे अच्छी नहीं लगतीं।
    तपन के बाद बरसातें, किसे अच्छी नहीं लगतीं।
    मिलन होता जहाँ बिछड़ी हुई, कुछ आत्माओं का,
    सुहानी चाँदनी रातें, किसे अच्छी नहीं लगतीं।।


    आज तो गज़ब कर दिया……………क्या भाव भर दिये हैं…………हम तो इन्ही मे डूब गये हैं………………आज के अन्दाज़ पर तो क्या कहें………………सिर्फ़ यही……………॥बेहतरीन, लाजवाब,शानदार्।

    उत्तर देंहटाएं
  3. आप की सुंदर सुंदर कविताये , किसे अच्छी नही लगती,
    अजी सभी का मन मोह लेती है, बहुत सुंदर. धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  4. दोनों ही क्षणिकाये एक से बढ़ कर एक है.

    कोई प्यार मुहोब्बत को जान देता है तो
    कोई गुलो-गुलशन की बर्बादी पे रोता है.

    कितना फर्क है ना सिविल पुलिस और फौजी लाईफ में.

    सशक्त रचना.

    उत्तर देंहटाएं
  5. अपनी पोस्ट के प्रति मेरे भावों का समन्वय
    कल (23/8/2010) के चर्चा मंच पर देखियेगा
    और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा।

    उत्तर देंहटाएं
  6. वाह! शास्त्री जी! बहुत सुन्दर और शानदार रचना लिखा है आपने! सच्चाई को व्यक्त करते हुए बेहतरीन प्रस्तुती!

    उत्तर देंहटाएं
  7. वाह-वाह शास्त्री जी, बहुत खूब !

    उत्तर देंहटाएं
  8. जुल्म का सामना करने को, जिसको ढाल माना था-
    सितम करती वही खादी, हमें अच्छी नहीं लगती।।


    ....बहुत सुन्दर और सशक्त कविता...बधाई.

    उत्तर देंहटाएं
  9. आपकी रचनाएं हमेशा ही सशक्त और रचनात्मक संदेश लिये हुये होती हैं.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  10. सुंदर सार्थक और सटीक निशाने वाली रचना ।

    उत्तर देंहटाएं
  11. दोनों मुक्तक लाजवाब हैं ..बहुत सुन्दर प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  12. दोनों ही क्षणिकाये बहुत सुंदर |

    उत्तर देंहटाएं
  13. शास्त्री जी,
    आपकी रचनाएँ अपने आप में सम्पूर्ण होती हैं...
    काव्य, भाव, प्रवाह और सन्देश, सभी का सुखद समिश्रण...
    बहुत अच्छा लगा, आपका कुछ बातों का अच्छा लगना और कुछ बातों का अच्छा नहीं लगना ...:):)
    धन्यवाद..!!

    उत्तर देंहटाएं
  14. बहुत सुन्दर लिखा है शास्त्री जी आपने. अंतिम लाइन तो दिल को छू गई.

    उत्तर देंहटाएं

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