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शनिवार, 21 अगस्त 2010

"अमरूद" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

guava2आ गई बरसात तो,
अमरूद गदराने लगे।
स्वच्छ जल का पान कर,
डण्ठल पे इतराने लगे।।
images (23) डालियों पर एक से हैं,
रंग में और रूप में
खिल रहे इनके मुखौटे,
गन्दुमी सी धूप में।।
कुछ हैं छोटे. कुछ मझोले,
कुछ बड़े आकार के।
मौन आमन्त्रण सभी को,
दे रहे हैं प्यार से।
images (2)किसी का मन है गुलाबी,
और किसी का है धवल।
पीत है चेहरा किसी का,
और किसी का तन सबल।।
स्वस्थ रहने के लिए,
खाना इसे वरदान है।
नाम का अमरूद है,
लेकिन गुणों की खान है।।

13 टिप्‍पणियां:

  1. अमरुद देखकर तो मुँह में पानी आ गया! पर्थ में तो नहीं मिलेगा इसलिए तस्वीर देखकर ही मन भरना होगा! बहुत सुन्दरता से आपने अमरुद के गुणों के बारे में लिखा है और मुझे तो अमरुद बेहद पसंद है खासकर पका हुआ लाल लाल सा!

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत ही सुन्दर कविता………अमरूद के सारे गुण लिख दिये।

    उत्तर देंहटाएं
  3. सच में मुँह में पानी आ गया.... अब तो अमरुद का सीज़न भी आ रहा है.... वैसे मेरे पास अमरुद के २० पेड़ हैं.... गोरखपुर में... हर साल पेड़ों को धुलवा कर पूरे जतन से अमरुद के फलों को रखाते हैं... बहुत अच्छी लगी आपकी यह पोस्ट...

    उत्तर देंहटाएं
  4. जितने मीठे आम, उतनी सुन्दर कविता।

    उत्तर देंहटाएं
  5. वाह आज तो लगता है अमरूद तोदने ही पडेंगे, हमारे यहां बःई लगे हैं. आपका तो कविता लिखने में कोई सानी ही नही है.

    रामराम

    उत्तर देंहटाएं
  6. भूल सुधार :०

    बःई = भी

    पढें.ाम

    रामर

    उत्तर देंहटाएं
  7. आह अमरुद ....मुंह में पानी आ गया ..
    यहाँ दुनिया की हर चीज़ मिलती है ..बस अमरुद नहीं मिलते :(

    उत्तर देंहटाएं
  8. अब तो खाने का मन हो रहा है, सुन्दर प्रस्तुति रही, बधाई ।

    उत्तर देंहटाएं
  9. स्वस्थ रहने के लिए,
    खाना इसे वरदान है।
    नाम का अमरूद है,
    लेकिन गुणों की खान है।
    वाह शास्त्री जी। क्या बात है!
    ज़बर्दस्त क्वालिटी के अमरूदों का चित्र लगाया है आपने।

    उत्तर देंहटाएं
  10. अमरुद देखकर तो मुँह में पानी आ गया! अब जल्दी सॆ एक टोकरी अमरुद भिजवा दो, बहुत साल हो गये अमरुद खाये हुये.
    धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  11. अमरुद महिमा पढ़ खाने को जी ललचा गया.

    उत्तर देंहटाएं

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