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शुक्रवार, 3 दिसंबर 2010

"दामाद" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

 पाहुन का है अर्थ घुमक्कड़, 
यम का दूत कहाता है।
सास-ससुर की छाती पर, 
बैठा रहता जामाता है।।

खाता भी, गुर्राता भी है, 
सुनता नही सुनाता है। 
बेटी को दुख देता है तो, 
सीना फटता जाता है।।

चंचल अविरल घूम रहा है , 
ठहर नही ये पाता है।
धूर्त भले हो किन्तु मुझे, 
दामाद बहुत ही भाता है।।

(चित्र गूगल छवि से साभार) 

17 टिप्‍पणियां:

  1. धन्य हों आप, हमारे ससुराल को भी यही ज्ञान दे दें।

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  2. वाह! ऐसा ससुर सबको मिले।
    नमन आपको।

    उत्तर देंहटाएं
  3. shastri ji -swaym ka damad hona bhata hai ya apna damad bhata hai ? ye baat samajh me na aate huye bhi kavita achchhi lagi .

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  4. आपने बहुत दुखद बात कही है और यह तब जब आज ही मेरा दामाद मेरी लैपटॉप में मेरी आवश्यकता क सॉफ़्टवैयर भरकर लाया है.सुबह से मुझे सिखाने में लगा है.सप्ताह भर से दोनों दामाद मेरी आवश्यकता की हर वस्तु जैसे माउस लैपटॉप स्टैन्ड और न जाने क्या क्या खरीद रहे थे. न जाने कितने गीत व सिनेमा चुन चुनकर दोनों ने भरे हैं.सुबह विमान पकड़ने के लिए साढ़े तीन बजे का उठा वह मेरी एक एक समस्या का समाधान कर रहा है। मुझ जैसी भुलक्कड़ को हरेक बात लिखवा रहा है।
    अच्छे बुरे लोग ही अच्छे बुरे दामाद या ससुर बनते हैं.
    हाँ दामाद का जो पारम्पारिक रूप हमने बनाया है वह अवश्य बुरा है.
    घुघूती बासूती

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  5. मजा यह कि इस लैपटॉप पर यह पोस्ट पहली ही खोली थी और उसे भी पढ़वाई।
    घुघूती बासूती

    उत्तर देंहटाएं
  6. कुछ कुछ खट्टी कुछ कुछ मीठी :)

    उत्तर देंहटाएं
  7. तभी दामाद को 10वां ग्रह कहा गया है……………बेहद खूबसूरत प्रस्तुति।

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत खूब..इससे ज्यादा क्या कहें.

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  9. बहुत अच्छी ओर रोचक लगी यह कविता....

    उत्तर देंहटाएं
  10. अच्छी ओर रोचक लगी यह कविता

    उत्तर देंहटाएं
  11. :) :)...अब मैं क्या कहूँ ? जिसने लिखी है वो भी तो दामाद होंगे न किसी के ...
    मुझे तो दामाद का घुघूती बासूती जैसा अनुभव है ...

    उत्तर देंहटाएं
  12. aapki yeh haasya rachna bahut achchi lagi...achcha hua aaj hi padhi..kal hi mera damaad vapas gaya hai...ha ha ha..

    उत्तर देंहटाएं

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