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बुधवार, 22 दिसंबर 2010

"कुहरा छाया नील गगन मे" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

शीतलता बढ़ गई पवन में।
कुहरा छाया नील गगन में।
IMG_0829
चारों ओर अन्धेरा छाया,
सूरज नभ में है शर्माया,
पंछी बैठे ठिठुर रहे हैं,
देख रहे हैं घर-आँगन में।
कुहरा छाया नील गगन में।

वाहन की गति हुई मन्द है,
चहल-पहल हो गई बन्द है,
शीतल धुआँ नजर आता है,
ऊनी कपड़े लदे बदन में।
कुहरा छाया नील गगन में।

24 टिप्‍पणियां:

  1. सच कह रहे हैं ...........हमारे भी हाथ ठिठुर रहे हैं ..........सर्दी ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है .

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (23/12/2010) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।
    http://charchamanch.uchcharan.com

    उत्तर देंहटाएं
  3. कुहरा छाया नील गगन में, अच्‍छी रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  4. श्रीमान जी कविता बहुत ही सुन्दर है। सच्चाई का वर्णन है। ये कविता बेहद पसंद आई।

    उत्तर देंहटाएं
  5. कोहरे का बहुत सही और सुन्दर वर्णन ..अच्छी रचना .

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत ठन्ड है.. आपकी कविता पढ़कर और लगने लगी..

    उत्तर देंहटाएं
  7. कोहरा, ठण्डक और मन्द हुये जीवन का सुन्दर चित्रण।

    उत्तर देंहटाएं
  8. सर जी इस ठढं को और कितना बढ़ाएगें। सुन्दर रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  9. कोहरा नील गगन में छाये तब तो चलता है
    ब्‍लॉग जगत में टिप्‍पणी न आये तो खलता है

    उत्तर देंहटाएं
  10. कोहरा तो सच मे ही छा गया हे जी , सुना हे सर्दी भी अपने जोवन पर हे भारत मे,बहुत सुंदर रचना ओर सुंदर चित्र. धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत सुंदर ...पढने के साथ ही ठंडक ने आ दबोचा

    उत्तर देंहटाएं
  12. वाहन की गति हुई मन्द है,
    चहल-पहल हो गई बन्द है,
    शीतल धुआँ नजर आता है,
    ऊनी कपड़े लदे बदन में।
    कुहरा छाया नील गगन में।

    सादगी से लबरेज़ सार्थक अभिव्यक्ति

    उत्तर देंहटाएं
  13. बहुत ही सुन्दर ाउर समसामयिक रचना बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  14. कुहरा छाया नील गगन में … समसामयिक रचना । लेकिन इसे पढ़कर याद आया कि ठण्ड समाई हमारे बदन में ।

    उत्तर देंहटाएं
  15. सर्दिओं का रंग शब्दों मे। बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  16. वाहन की गति हुई मन्द है,
    चहल-पहल हो गई बन्द है,
    शीतल धुआँ नजर आता है,
    ऊनी कपड़े लदे बदन में।
    कुहरा छाया नील गगन में।।
    खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति,शास्त्री जी !

    उत्तर देंहटाएं
  17. पारा ठिठका 6 से नीचे.
    कोहरा छाया नील गगन में ।

    मौसम का संदेश बताती उत्तम भावपर्ण रचना । आभार...

    उत्तर देंहटाएं

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