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रविवार, 12 दिसंबर 2010

"...उम्र तमाम हुई" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

अपनों की रखवाली करते-करते उम्र तमाम हुई।
पहरेदारी करते-करते सुबह हुई और शाम हई।। 

सुख आये थे संग में रहने. 

डाँट-डपट कर भगा दिया, 

जाने अनजाने में हमने, 

घर में ताला लगा लिया, 

पवन-बसन्ती दरवाजों में, आने में नाकाम हुई। 

पहरेदारी करते-करते सुबह हुई और शाम हई।। 

मन के सुमन चहकने में है, 

अभी बहुत है देर पड़ी, 

गुलशन महकाने को कलियाँ, 

कोसों-मीलों दूर खड़ीं, 

हठधर्मी के कारण सारी आशाएँ हलकान हुई। 

पहरेदारी करते-करते सुबह हुई और शाम हई।। 

चाल-ढाल है वही पुरानी, 

हम तो उसी हाल में हैं, 

जैसे गये साल में थे, 

वैसे ही नये साल में हैं, 

गुमनामी के अंधियारों में, खुशहाली परवान हुई।

पहरेदारी करते-करते सुबह हुई और शाम हई।।

17 टिप्‍पणियां:

  1. निर्मल मन अपना आत्मलोचन खुद करता है। जिन विडंबनाओं के बीच हमारा जीवन बीतता है,उसका पछतावा जब होता है,तब तक काफी वक्त बीत चुका होता है। जब सत्य की अनुभूति हो,उसी वक्त स्वयं नई शुरूआत हो जाती है।

    उत्तर देंहटाएं
  2. चाल-ढाल है वही पुरानी,
    हम तो उसी हाल में हैं,
    जैसे गये साल में थे,
    वैसे ही नये साल में हैं,
    क्या बात कही है
    बहुत बढ़िया.

    उत्तर देंहटाएं
  3. चाल-ढाल है वही पुरानी,
    हम तो उसी हाल में हैं,
    जैसे गये साल में थे,
    वैसे ही नये साल में हैं,

    बड़ा प्यारा गीत है और नए साल के आने के मौक़े पर सामयिक भी.

    उत्तर देंहटाएं
  4. क्यों निराशाओं की बात हुई ?
    क्यों जिंदगी हलकान हुई
    उठो जागो भया सवेरा
    अभी क्यों थकने की बात हुई ?

    उत्तर देंहटाएं
  5. चाल-ढाल है वही पुरानी,
    हम तो उसी हाल में हैं,
    जैसे गये साल में थे,
    वैसे ही नये साल में हैं,

    बेहद प्रभावी..... सुंदर

    उत्तर देंहटाएं
  6. पंडित जी! बड़ा ही प्यारा लगा आपका आत्मकथ्य! एक नज़र गुज़रे सालों पर डालने और आत्ममंथन करने पर ऐसे ही गीत की सर्जना होती है.
    वैसे हमारी कामना होगी कि नया साल वैसा न हो कि आपको अगले साल भी ऐसी रचना प्रस्तुत करनी पड़े!!सादर!

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  7. बहुत अच्छा विश्लेषण किया है | बधाई
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  8. कर्तव्यों की राह भागी जा रही है यह उम्र।

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  9. गुमनामी के अंधियारों में , खुशहाली परवान हुई।
    बहुत सुन्दर छंद बद्ध अभिव्यक्ति।

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  10. बहुत ही भावपूर्ण अभिव्यक्ति..... आभार पंडित जी

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  11. बहुत ही भावपूर्ण रचना ... आत्म चिंतन की पराकाष्ठा ...

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  12. आत्मावलोकन कराती एक बेहद उम्दा रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  13. बेहद ही मर्मस्पर्शी रचना। आपका धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं

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